फतेह लाइव, रेपोर्टर।
डिजिटल स्क्रीन और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच बच्चों को भारतीय परंपराओं, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने के उद्देश्य से जेसीआई जमशेदपुर रॉयल्स ने विशेष पहल की। सावन के पवित्र महीने में साकची स्थित अग्रसेन भवन में ‘बाल पार्थिव शिवलिंग पूजा’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पांच से 15 वर्ष आयु वर्ग के 108 बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
पूजा के दौरान बच्चों ने भगवान शिव की आराधना की और भारतीय संस्कृति एवं धार्मिक परंपराओं से जुड़े मूल्यों को समझने का प्रयास किया। आयोजन का उद्देश्य बच्चों को रोचक और सार्थक तरीके से आध्यात्मिकता से जोड़ना रहा। इसके माध्यम से उन्हें कुछ समय के लिए डिजिटल स्क्रीन और सोशल मीडिया से दूर रखते हुए आस्था, संस्कृति और जीवन मूल्यों की समझ विकसित करने का प्रयास किया गया।
जेसीआई जमशेदपुर रॉयल्स के अध्यक्ष विवेक अग्रवाल ने बताया कि कार्यक्रम का आयोजन संगठन की महिला विंग की ओर से किया गया। उन्होंने महिला सदस्यों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों के लिए आध्यात्मिकता, सीखने और सांस्कृतिक जागरूकता को जोड़ने वाला कार्यक्रम तैयार किया गया।
कहानी सत्र ने बच्चों को किया आकर्षित
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने पूजा के साथ आयुषी भौका द्वारा आयोजित कहानी सत्र में भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसमें भगवान शिव के महत्व और भक्ति की भावना को बच्चों के लिए सरल एवं रोचक तरीके से प्रस्तुत किया गया। कहानी के माध्यम से बच्चों को धार्मिक परंपराओं और उनके पीछे छिपे मूल्यों को समझाने का प्रयास किया गया।
इस अवसर पर पंडित जी की ओर से वैदिक विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई गई। कार्यक्रम में ‘भक्ति के साथ सृजन, उद्देश्य के साथ सीखना, मूल्यों के साथ आगे बढ़ना और समझ के साथ पूजा’ का संदेश दिया गया। बच्चों को बताया गया कि धार्मिक परंपराएं केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से अनुशासन, श्रद्धा और जीवन मूल्यों की सीख भी मिलती है।
आज के दौर में डिजिटल उपकरण बच्चों के दैनिक जीवन का हिस्सा बनते जा रहे हैं। ऐसे में आयोजकों के अनुसार, यह पहल बच्चों को संवाद, सीखने और भारतीय संस्कृति से जुड़ने का सकारात्मक मंच देने की दिशा में एक प्रयास रही।
कार्यक्रम का समापन ‘आइए, मिलकर आस्था का निर्माण करें’ संदेश के साथ हुआ। आयोजन के माध्यम से जेसीआई जमशेदपुर रॉयल्स ने बच्चों में आध्यात्मिक समझ, सांस्कृतिक जागरूकता और सकारात्मक जीवन मूल्यों को बढ़ावा देने का प्रयास किया।









































