पांच दिन बाद भी नहीं हो सका हत्या का उदभेदन, उससे पहले खून की उल्टियां कर सीसीयू पहुंचा राघव
मीडिया का चोला ओढ़ने वाले सफेदफोश अशोक उर्फ राघव के जवाबों ने उड़ाए होश
28 अगस्त को निखार का था जन्मदिन, मां अब भी बेसुध
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
जमशेदपुर पुलिस के लिए एक बड़ा सवाल चुनौती वाला साबित हो रहा है, वह यह है कि आखिरकार कब तक लौहनगरी में गैंगवार और दहशत फैलाने के लिए निखार सबलोक जैसे कितने बेगुनाह मौत के काल में समाते रहेंगे। गत 24 अगस्त को सरायकेला जिला के चांडिल थाना अंतर्गत आसनबनी स्थित टेंथ माइल होटल परिसर से बाहर निकलते हुए कदमा विजय हेरिटेज निवासी युवा होटल कारोबारी निखार सबलोक की हत्या गोलियों से भूनकर कर दी थी। घटना के बाद दोनों जिला की पुलिस टीम रेस हुई, लेकिन पांच दिन बीत जाने के बाद भी अब तक मामले का उदभेदन नहीं हुआ। इधर, सूत्र बताते हैं कि संभवता आजकल में पुलिस मामले का खुलासा करने वाली थी, पुलिस के हाथ साजिशकर्ता के रूप में अशोक सिंह राघव और एक शूटर भी लग चुका है, लेकिन इसी बीच शनिवार को चांडिल थाना में घटना के बाद पूछताछ के लिए हिरासत में लिए गए सोनारी निवासी अशोक सिंह उर्फ राघव को खून की ऐसी उल्टियां शुरू हुई कि उसे एमजीएम अस्पताल लाया गया, जहां से उसे टीएमएच भेज दिया गया और सीसीयू में वह इलाजरत है। इसलिए आज निखार हत्याकांड से पर्दा नहीं उठ सका।

बहरहाल, अशोक उर्फ राघव की बात करें तो बहुत कम समय में जमशेदपुर में उसने अलग रुतबा कमाया। उत्तराखंड में मारे गए गैंगस्टर विक्रम शर्मा की हत्या के बाद वह ज्यादा चर्चा में बना। विक्रम शर्मा का 600 से 800 करोड़ का साम्राज्य विक्रम उद्योग लिमिटेड का डायरेक्टर बनने के बाद सोशल और प्रिंट मीडिया में विज्ञापन के मार्फत खूब चर्चा में बना। वहीं, एक अंग्रेजी न्यूज पेपर का सीईओ और विक्रम शर्मा द्वारा शुरू किये गए एक डिजिटल मीडिया का एमडी बनकर सफेदपोश होने का ऐसा चोला ओढ़ा कि लोग कुछ समझ ही नहीं सके। इस 15 अगस्त बड़े बड़े मीडिया हॉउस को डिजिटल मीडिया के मार्फत लाखों लाखों का विज्ञापन देकर नशा मुक्त समाज बनाने का दावा किया गया, लेकिन कहते हैं ना नस्ल नस्ल की बात। वह कहावत राघव पर चरितार्थ हुई और उसकी अपराध वाली सोच ने निखार सबलोक को मौत के काल में ढकेल दिया।

हालांकि पुलिस के खुलासे ही बतायेंगे कि राघव की निखार हत्याकांड में क्या भूमिका रही, लेकिन अब तक पुलिस और अपराध जगत के सूत्रों से जो खबर छनकर सामने आई है, वह आपको भी हैरान करने वाली है। चर्चा है कि निखार की हत्या के लिए 25 लाख रूपये राघव ने ही दिए थे। इसके लिए डिमना रोड में फायरिंग का आरोपी सिंटू सिंह को चुना गया। जेल में अखिलेश सिंह से हाथ मिलाने के बाद वह राघव से मिला और उसी ने निखार की हत्या के लिए शूटर उपलब्ध कराये। घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज में भी सिंटू सिंह की तस्वीर देखे जाने के बाद पुलिस ने जांच और तेजी से आगे बढ़ाई। तब राघव से पूछताछ के बाद हत्याकांड में दुमका जेल में बंद गैंगस्टर अखिलेश सिंह का कनेक्शन सामने आया।

सूत्रों के अनुसार इससे भी ऊपर राघव की सांठगांठ बड़े बड़े मीडिया हॉउस के क्राइम रिपोर्टरों से थी। इसके लिए वह कुछ पत्रकारों को मासिक वेतन भी भुगतान करता था। यह भुगतान चाहे खबरों के आदान प्रदान का हो या फिर अपराध और पुलिस की गतिविधियों का, जांच के बाद ही पटाक्षेप होगा। चर्चा तो यह भी बाजार में घूम रही है कि राघव की उन रिपोर्टरों के साथ चैट भी पुलिस के हाथ लगी है। पुलिस ने एक पत्रकार को इसके लिए चेताया भी है। वैसे पुलिस अगर इस मामले में बड़ी उपलब्धि हासिल करना चाहे तो उन पत्रकारों के और उनके परिजनों के बैंक अकॉउंट खंगालकर इसका पता लगा सकती है कि राघव इतनी मोटी मासिक रकम इन बड़े मीडिया हॉउस के पत्रकारों को किस उद्देश्य से पहुंचाता था। खैर, इससे पत्रकार समाज में भी काफी चर्चा है। लाखों लाखों का विज्ञापन देकर नशा मुक्त समाज का संदेश देने वाला राघव खुद बढ़ते गैंगवार का सबब बना फिर रहा था।
निखार हत्याकांड ही नहीं इससे पूर्व टिस्को के सुरक्षा अधिकारी जयराम सिंह की वर्षों पूर्व हुई हत्या में अखिलेश सिंह का नाम आया था। अब स्व. जयराम किस गैंग के थे जो उनकी हत्या की गई। सीरियल क्राइम के दौरान भी चिकित्सक डॉ प्रभात, जैसे कई बेगुनाह मौत के काल में समां दिए गए। दरअसल, यह ख़ूनी नदियां केवल और केवल अपने नाम की दहशत कायम करने की कहानी ही बयां करती हैं, तांकि अवैध कमाई का स्त्रोत बंद ना हो, यह पूरा मामला जमशेदपुर के लिए चुनौती है कि वह शहर के गैंगस्टरों पर कैसे शिकंजा लगाती है। निखार सबलोक का 28 अगस्त को जन्मदिन था। उसकी मां अब तक बेसुध है। दोबारा किसी निर्दोष की मां का सहारा ना छीना जाये, इसके लिए पुलिस की इस हत्याकांड में की जाने वाली कार्रवाई पर आम जन की निगाहें टिकी हुई हैं?
बागबेड़ा के युवक की हत्या की थी योजना
वैसे, निखार के हत्या के पूर्व बागबेड़ा के एक अपराधी की हत्या की योजना थी। पुलिस पूछताछ में इस बात का भी जिक्र हुआ है। यह हत्या होती तो गैंगवार की ओर इशारा जाता। उस वक्त एक अपराधी कोर्ट में पेशी के लिए गया था। वह अपनी स्कार्पियो से उतरकर कोर्ट नहीं गया, जिस कारण उसकी जान बच गई और बाद में यही गैंग दहशत बनाने के लिए निखार की हत्या कर देता है। सीएच एरिया की करोड़ों की जमीन के मामले में हत्या के कुछ दिन पूर्व ही भूपेंद्र सिंह ने अशोक उर्फ राघव की शिकायत पुलिस मुख्यालय पहुंचकर सिटी एसपी को ज्ञापन देकर की थी। उसमें अखिलेश गैंग के राघव, शरद पोद्दार की कारगुजारियां बयां की थी कि किस तरह उनका अपहरण कर पुरुलिया ले जाया गया, फिर पावर ऑफ़ अटर्नी पर दस्तखत लिए। सूत्रों के अनुसार उस खेल में भी करीब 28 करोड़ रूपये का वारा न्यारा राघव और गैंग को हुआ था। निखार मामले में भूपेंद्र सिंह की मदद कर रहे थे। इस कड़ी पर भी पुलिस ने पूछताछ की है, अब खुलासा होना बाकी है?



































