खेल के प्रति टाटा स्टील की अटूट प्रतिबद्धता, चैंपियन गढ़ने से सशक्त समुदाय और स्वस्थ भविष्य के निर्माण तक
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
खेल के क्षेत्र में लगभग एक सदी पुरानी गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाते हुए टाटा स्टील आज भी भारत के खेल जगत को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। खिलाड़ियों को तैयार करने से लेकर जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान, विश्वस्तरीय प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने और खेलों के माध्यम से स्वस्थ एवं सशक्त समुदायों के निर्माण तक कंपनी की प्रतिबद्धता लगातार मजबूत होती जा रही है।
राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट, कॉर्पोरेट सर्विसेज़ डी. बी. सुंदर रामम ने कहा कि टाटा स्टील में खेल केवल प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे कंपनी की संस्कृति और जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा, “खेल स्वस्थ जीवनशैली, समावेशिता, अनुशासन और उत्कृष्टता को बढ़ावा देने का एक सशक्त माध्यम हैं। खेलों के प्रति टाटा स्टील की प्रतिबद्धता लगभग एक सदी पुरानी है और आज भी भारत के खेल जगत में हमारा योगदान नई दिशा दे रहा है।”
सर दोराबजी टाटा ने रखी थी खेल विरासत की मजबूत नींव
टाटा स्टील की खेल विरासत की नींव सर दोराबजी टाटा ने रखी थी। वर्ष 1920 में एंटवर्प ओलंपिक के लिए भारत की पहली ओलंपिक टीम को आर्थिक सहयोग देकर उन्होंने भारतीय खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा। इसके बाद से टाटा स्टील देश में खेलों को प्रोत्साहित करने वाली अग्रणी संस्थाओं में शामिल रही है और खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों की कई पीढ़ियों को निरंतर सहयोग देती आ रही है।
खेलों के क्षेत्र में टाटा स्टील की इस समृद्ध विरासत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कंपनी के खेल तंत्र से जुड़े खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों में 1 पद्म भूषण, 12 पद्म श्री, 1 खेल रत्न, 6 द्रोणाचार्य, 42 अर्जुन पुरस्कार और 1 ध्यानचंद लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार विजेता शामिल रहे हैं।
19 खेल विधाओं में मजबूत स्पोर्ट्स इकोसिस्टम
आज टाटा स्टील 19 खेल विधाओं में अकादमियों और प्रशिक्षण केंद्रों का एक व्यापक खेल तंत्र संचालित कर रही है। इनमें फुटबॉल, तीरंदाजी, हॉकी, एथलेटिक्स, तैराकी, बास्केटबॉल, बैडमिंटन, क्रिकेट, गोल्फ, रोइंग और स्पोर्ट क्लाइम्बिंग सहित अन्य खेल शामिल हैं।
इन संस्थानों में खिलाड़ियों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण के साथ स्पोर्ट्स मेडिसिन, पोषण, मानसिक मजबूती के लिए विशेष प्रशिक्षण और विश्वस्तरीय खेल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, ताकि वे अपनी पूरी क्षमता के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन कर सकें।
टाटा स्टील की प्रमुख खेल पहलों में टाटा फुटबॉल अकादमी, टाटा आर्चरी अकादमी, नवल टाटा हॉकी अकादमी, टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन, रोइंग अकादमी और स्पोर्ट क्लाइम्बिंग अकादमी शामिल हैं।
दीपिका कुमारी से लेकर नई पीढ़ी के सितारों तक
इन संस्थानों ने देश को कई उत्कृष्ट खिलाड़ी दिए हैं। इनमें फुटबॉल के कल्याण चौबे और सुब्रत पॉल, तीरंदाजी की विश्वस्तरीय खिलाड़ी दीपिका कुमारी, कोमोलिका बारी, जयंत तालुकदार, अंकिता भकत और भजन कौर के अलावा पैरा-बैडमिंटन चैंपियन उमेश विक्रम कुमार जैसे खिलाड़ी शामिल हैं।
नई पीढ़ी की प्रतिभाएं भी टाटा स्टील के खेल तंत्र से लगातार आगे बढ़ रही हैं। हाल ही में आशीष तानी पूर्ति ने मस्कट, ओमान में आयोजित मेंस यूथ हॉकी5एस एशिया चैंपियनशिप 2026 में भारतीय पुरुष युवा हॉकी टीम के लिए शानदार प्रदर्शन किया। वहीं, 14 वर्षीय शतरंज खिलाड़ी अधिराज मित्रा ने भी अपनी उपलब्धियों से झारखंड का नाम रोशन किया है।
ये उपलब्धियां प्रतिभाओं की पहचान करने, उन्हें निखारने और दीर्घकालिक सहयोग प्रदान करने की टाटा स्टील की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
टाटा फुटबॉल अकादमी ने तैयार किए 300 से अधिक कैडेट्स
वर्ष 1987 में स्थापित टाटा फुटबॉल अकादमी अब तक 300 से अधिक कैडेट्स को प्रशिक्षण दे चुकी है। इनमें करीब 50 प्रतिशत खिलाड़ियों ने विभिन्न आयु वर्गों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है, जबकि कई खिलाड़ी आगे चलकर पेशेवर फुटबॉल में अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहे हैं।अकादमी को 2026-27 सत्र के लिए ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) की प्रतिष्ठित 5-स्टार मान्यता भी मिली है।
इसी प्रकार, टाटा आर्चरी अकादमी झारखंड, ओडिशा और आदिवासी समुदायों से आने वाली प्रतिभाओं को व्यवस्थित और वैज्ञानिक प्रशिक्षण के माध्यम से निखारने वाले प्रतिष्ठित केंद्र के रूप में स्थापित हो चुकी है।
वहीं, 3 रीजनल डेवलपमेंट सेंटर और 32 ग्रासरूट स्तर के प्रशिक्षण केंद्रों के सहयोग से नवल टाटा हॉकी अकादमी भविष्य के हॉकी खिलाड़ियों की मजबूत श्रृंखला तैयार करने में जुटी हुई है।
ग्रामीण और आदिवासी युवाओं तक पहुंच रहा खेल का अभियान
टाटा स्टील की खेल नीति केवल उच्चस्तरीय खिलाड़ियों और राष्ट्रीय अकादमियों तक सीमित नहीं है। कंपनी जमीनी स्तर पर भी खेल प्रतिभाओं को विकसित करने पर विशेष जोर दे रही है।
सामुदायिक कार्यक्रमों और फीडर सेंटरों के माध्यम से हर साल हजारों युवाओं को खेलों से जोड़ा जा रहा है, जिसमें ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है। वर्ष 2025-26 में 29,000 से अधिक युवाओं ने इन खेल पहलों में भाग लिया।
इन कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को केवल खेल का अवसर ही नहीं मिलता, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन, शिक्षा और बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का भी अवसर मिलता है।
एवरेस्ट फतह करने वाले 13 पर्वतारोही भी इस विरासत का हिस्सा
एडवेंचर स्पोर्ट्स भी टाटा स्टील की खेल संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन के माध्यम से कई पर्वतारोहियों ने दुनिया की चुनौतीपूर्ण चोटियों को फतह किया है। इनमें 13 पर्वतारोही ऐसे हैं, जिन्होंने सफलतापूर्वक माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की है। यह उपलब्धि खेलों के माध्यम से विकसित होने वाले साहस, दृढ़ता, अनुशासन और निरंतर प्रयास जैसे मूल्यों को भी दर्शाती है।
खेलों को जन-जन तक पहुंचाने की पहल
टाटा स्टील की प्रतिबद्धता केवल खिलाड़ियों को तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अधिक से अधिक लोगों को खेल और फिटनेस से जोड़ने पर भी कंपनी का विशेष जोर है।
कंपनी टाटा स्टील वर्ल्ड 25K कोलकाता, जमशेदपुर, जोडा और कपिलाश रन-ए-थॉन के साथ-साथ यूरोप में लानेली हाफ मैराथन, रिचर्ड बर्टन 10K और टाटा किड्स ऑफ स्टील जैसे आयोजनों को भी प्रायोजित करती है।
शतरंज के क्षेत्र में भी टाटा स्टील की पहचान वैश्विक स्तर पर मजबूत है। टाटा स्टील चेस इंडिया एशिया का एकमात्र रैपिड और ब्लिट्ज आयोजन है, जो प्रतिष्ठित ग्रैंड चेस टूर का हिस्सा है। वहीं, नीदरलैंड्स में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित टाटा स्टील चेस टूर्नामेंट में वर्ष 1938 से दुनिया के शीर्ष शतरंज खिलाड़ी हिस्सा लेते आ रहे हैं।
चैंपियन के साथ स्वस्थ और सशक्त समाज का भी लक्ष्य
डी. बी. सुंदर रामम ने कहा कि आने वाले समय में टाटा स्टील का विजन प्रतिभाओं को निखारने, खेलों तक पहुंच बढ़ाने और भारत के खेल तंत्र को और मजबूत करने पर केंद्रित रहेगा।उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर खेलों के विकास, उच्चस्तरीय प्रशिक्षण अकादमियों और समावेशी भागीदारी में निरंतर निवेश के माध्यम से टाटा स्टील आगे भी नए चैंपियन तैयार करने के साथ-साथ स्वस्थ, आत्मविश्वास से भरे और सशक्त समुदायों के निर्माण में योगदान देती रहेगी। उन्होंने कहा, “टाटा स्टील में खेल केवल एक गतिविधि नहीं हैं, बल्कि हमारी संस्कृति और जीवनशैली का हिस्सा हैं और आगे भी हमेशा बने रहेंगे।”



































