11 राउंड फायरिंग के बाद रायपुर से भी भागने की थी तैयारी, रायपुर में कार ने रोका रास्ता; शंकर मुंडा और दीपू ओझा भी दबोचे गए, मुख्य शूटरों की तलाश जारी
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
जमशेदपुर में सोनारी थाना इलाके के मरीन ड्राइव स्थित बिंदल मॉल के उडुपी रेस्टोरेंट में दिनदहाड़े 11 राउंड फायरिंग के बाद जमशेदपुर से निकलकर दूसरे राज्य में पनाह लेने की कोशिश कर रहे अपराधियों पर पुलिस ने शिकंजा कस दिया है। इस मामले में पुलिस ने टाटानगर के कुख्यात अपराधी टीटू शर्मा और मनोज सरकार समेत चार आरोपितों को छत्तीसगढ़ से गिरफ्तार किया है। इनके साथ शंकर मुंडा और दीपू ओझा भी पकड़े गए हैं।
जमशेदपुर में फायरिंग के बाद आरोपितों के फरार होने की सूचना पर पुलिस ने दूसरे राज्यों की पुलिस को अलर्ट किया था। इसी इनपुट के आधार पर छत्तीसगढ़ पुलिस ने कार्रवाई की। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, चारों को रायपुर क्षेत्र में पकड़ा गया और बाद में जमशेदपुर पुलिस ने उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर अपने कब्जे में लिया।
पुलिस जांच के अनुसार, बिंदल मॉल में गोलियां चलने के बाद आरोपितों ने शहर से बाहर निकलने की तैयारी कर ली थी। फरारी के लिए वाहनों का इस्तेमाल किया गया। पुलिस ने रास्तों पर निगरानी बढ़ाई और दूसरे राज्यों की पुलिस के साथ सूचना साझा की। इसी कार्रवाई के दौरान चारों पुलिस के हाथ लगे।
रायपुर की रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि पुलिस की पकड़ में आने वाले चारों की भूमिका फायरिंग की साजिश से जुड़ी बताई जा रही है, जबकि रेस्टोरेंट के भीतर सीधे गोलियां चलाने वाले मुख्य शूटरों तक पहुंचने के लिए जांच जारी है।
टीटू शर्मा और मनोज सरकार पर क्यों टिकी नजर?
गिरफ्तार आरोपितों में टीटू शर्मा और मनोज सरकार के नाम सामने आने के बाद बिंदल मॉल गोलीकांड की जांच का दायरा और बड़ा हो गया है। दोनों का नाम जमशेदपुर के अपराध जगत से जुड़ी गतिविधियों में पहले भी सामने आता रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों में टीटू शर्मा और मनोज सरकार के पुराने आपराधिक संबंधों तथा जमीन और ठेकेदारी से जुड़े विवादों के संदर्भ में जांच की बात सामने आई है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बिंदल मॉल में हमला किसके इशारे पर हुआ, हथियार और शूटरों की व्यवस्था किसने की तथा हमले के बाद फरारी का पूरा नेटवर्क किसने तैयार किया।
जमीन और रेलवे ठेकेदारी के विवाद से जुड़े तार
बिंदल मॉल गोलीकांड को लेकर पुलिस की जांच जमीन कारोबार और रेलवे ठेकेदारी से जुड़े वर्चस्व के विवाद के कोण पर भी चल रही है। घटना में घायल डोमनिक सैमसन के रेलवे ठेकेदारी से जुड़े होने तथा अन्य घायलों के जमीन कारोबार से जुड़े होने की जानकारी विभिन्न रिपोर्टों में सामने आई है।
जांच एजेंसियां पुराने संपर्क, विवाद और आपराधिक नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ रही हैं। पुलिस की पूछताछ में इस गोलीकांड के पीछे की पूरी साजिश और फायरिंग करने वालों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है। बताया जाता है कि रायपुर से सभी यूपी भागने वाले थे। फायरिंग में घायल झामुमो नेता सैमसन के जमीन, रेलवे में बढ़ते रुतबे को समाप्त करने के उद्देश्य से टीटू शर्मा और मनोज सरकार ने यह सारा खेल रचा था, लेकिन सभी घायल बच गए। टीटू शर्मा वैसे जमशेदपुर का है, लेकिन कई सालों से झारसुगड़ा में रहता है। वहां कुख्यात करण सिंह के संपर्क में आने के बाद सीकेपी रेल मंडल में ठेकेदारों पर अपना ख़ौफ बनाया। अक्सर वह शहर भी आना जाना करता था।
मॉल में गोलियों से दहला था मरीन ड्राइव
शनिवार दोपहर बिंदल मॉल के उडुपी रेस्टोरेंट में हथियारबंद बदमाशों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी थी। करीब 11 राउंड गोलियां चलने से मॉल में अफरा-तफरी मच गई थी। घटना में डोमनिक सैमसन, रिजवान, दिलशाद और कृष्णा चौधरी घायल हुए थे। घटना के बाद पुलिस के वरीय अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की थी और मामले में विशेष जांच टीम के स्तर पर कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
अब अगली गिरफ्तारी शूटरों की?
चार आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने अगली चुनौती प्रत्यक्ष रूप से गोली चलाने वाले शूटरों तक पहुंचना है। पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपितों से मिली जानकारी के आधार पर शूटरों, हथियार उपलब्ध कराने वालों और पूरे नेटवर्क की तलाश तेज होने की संभावना है।
बिंदल मॉल गोलीकांड अब सिर्फ फायरिंग की घटना नहीं रह गया है। चार गिरफ्तारियों के बाद पुलिस के सामने उस नेटवर्क को बेनकाब करने की चुनौती है, जिसने दिनदहाड़े मरीन ड्राइव के व्यस्त इलाके में हथियार चलाने की हिम्मत की।




































