Jamshedpur Court : जुगसलाई रेलवे फाटक में टाटा स्टील कर्मचारी और उसकी बेटी के आत्महत्या मामले से चार बरी हुए, हाईप्रोफाइल हो गया था मामला

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फतेह लाइव, रिपोर्टर.

जमशेदपुर के जुगसलाई रेलवे फाटक के पास 30 जून 2021 को टाटा स्टील के कर्मचारी प्रीतपाल सिंह सैनी और उनकी बड़ी बेटी बलजीत सैनी ने मालगाड़ी से कटकर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को जमशेदपुर कोर्ट में हुई। जहां प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार मिश्रा ने सबूतों के अभाव में चार आरोपियों को बरी कर दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी परमजीत सिंह सैनी, हरजीत सिंह, जसबीर कौर और हरजीत कौर को अदालत ने निर्दोष करार दिया।

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उस वक्त घटना के बाद प्रीतपाल के बड़े भाई परमजीत सिंह सैनी ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था, जबकि पत्नी जसबीर कौर को आदित्यपुर से गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा, हरजीत सिंह उर्फ बिट्टू और उनकी पत्नी हरजीत कौर ने भी जुगसलाई थाने में आत्मसमर्पण किया था। मृतक की पत्नी निशा सैनी ने मामला दर्ज कराया था।

इस मामले में मृतक की पत्नी निशा ने बिष्टुपुर गंगोत्री अपार्टमेंट के निवासी परमजीत सिंह सैनी, उनकी पत्नी जसबीर कौर, और गोलमुरी टिनप्लेट के निवासी राजेंद्र सिंह बिट्टू और उनकी पत्नी हरजीत कौर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने घटनास्थल से एक सुसाइड नोट बरामद किया था, जिसमें प्रीतपाल ने आत्महत्या के लिए इन्हीं लोगों को जिम्मेदार ठहराया था। मामले के अलावा परमजीत सैनी पर बलात्कार का भी आरोप लगा था.

सुसाइड नोट में प्रीतपाल ने लिखा था कि उस पर 222/2020 केस को वापस लेने का दबाव डाला जा रहा था, जिसमें उनकी पत्नी ने उनके बड़े भाई पर गंभीर आरोप लगाए थे। आरोप था कि उन्हें धमकियां दी जा रही थीं और दबाव बनाने के लिए बड़े नेताओं और गुंडों का भय दिखाया जा रहा था। साथ ही, दिसंबर 2020 से गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बावजूद उनकी गिरफ्तारी नहीं की जा रही थी।

नोट में यह भी उल्लेख किया गया कि 25 जून को परमजीत सिंह सैनी और अन्य ने उनके घर आकर हंगामा किया, गाली-गलौज की, और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई। इन घटनाओं से आहत होकर प्रीतपाल और उनकी बेटी ने आत्महत्या करने का फैसला किया। यह मामला तब सुर्खियों में बना था और हाई प्रोफाइल हो गया था। इसमें एक सिख नेता का नाम भी आया था। उस वक्त तत्कालीन सीजीपीसी के प्रधान ने उस नेता को काफी मदद की थी, जिसके बाद सिख नेता को सुपरविजन में राहत मिल गई थी।

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