डीबीएमएस कॉलेज में ‘बैटल ऑफ द बुक्स’, विद्यार्थियों ने साहित्य से निकाली उद्यमिता की राह
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
किताबें सिर्फ ज्ञान हासिल करने का जरिया नहीं, बल्कि नए विचारों और संभावनाओं की शुरुआत भी बन सकती हैं। इसका दिलचस्प उदाहरण शनिवार को डीबीएमएस कॉलेज ऑफ एजुकेशन में देखने को मिला, जहां विद्यार्थियों ने अपनी पसंदीदा किताबों से प्रेरणा लेकर ऐसे व्यावसायिक विचार प्रस्तुत किए, जिन्हें वास्तविक जीवन में व्यवसाय का रूप दिया जा सकता है।

कॉलेज की लाइब्रेरी की ओर से बहुउद्देशीय सभागार में ‘बैटल ऑफ द बुक्स’ प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस वर्ष इसकी थीम थी—“किताब से शार्क टैंक—किसी भी एक किताब से प्रेरित व्यावसायिक विचार प्रस्तुत करें।” प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबों में पढ़ी बातों को केवल ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय उन्हें समस्या-समाधान और उद्यमिता से जोड़ने के लिए प्रेरित करना था।
‘चॉकलेट फैक्ट्री’ से निकला चॉकलेट बिजनेस का आइडिया
प्रतियोगिता में छात्रा अंजलि मंडल की प्रस्तुति खास आकर्षण रही। उन्होंने रोआल्ड डाल की चर्चित पुस्तक ‘चार्ली एंड द चॉकलेट फैक्ट्री’ से प्रेरणा लेकर चॉकलेट बनाने के व्यवसाय की पूरी योजना प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि किताब से मिली प्रेरणा को किस तरह एक वास्तविक व्यवसायिक मॉडल में बदला जा सकता है।
इसी तरह अन्य विद्यार्थियों ने भी अलग-अलग पुस्तकों से प्रेरणा लेकर वित्तीय जागरूकता, लोगों की जरूरतों के अनुरूप नए उत्पाद एवं सेवाएं विकसित करने, छोटे स्तर से व्यवसाय शुरू करने, कौशल को रोजगार से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनने जैसे विषयों पर अपने विचार रखे।
विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में यह सोच भी सामने आई कि किसी भी व्यवसाय की शुरुआत केवल मुनाफे से नहीं, बल्कि किसी वास्तविक समस्या की पहचान और उसके उपयोगी समाधान से हो सकती है। विचार को छोटे स्तर पर आजमाना, लोगों की प्रतिक्रिया समझना और उसके आधार पर लगातार सुधार करना भी प्रस्तुतियों का हिस्सा रहा।
किताबों से प्रेरणा, सोच में बदलाव
कॉलेज की मेंटर एवं एडवाइजर डॉ. जूही समर्पिता ने निर्णायक की भूमिका निभाई। उन्होंने विद्यार्थियों की रचनात्मकता, पुस्तक से जुड़ाव, विचार की उपयोगिता, आत्मविश्वास और प्रस्तुतीकरण के आधार पर मूल्यांकन किया।
उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि किताबों से मिलने वाला ज्ञान तब अधिक सार्थक होता है, जब वह हमारी सोच को बदलने, नए सवाल उठाने और वास्तविक जीवन के लिए उपयोगी समाधान तलाशने की प्रेरणा दे। उन्होंने कहा कि लेखक जब लिखता है तो वह हमेशा यह नहीं जानता कि उसकी लेखनी आगे चलकर किसी के जीवन में कितनी बड़ी प्रेरणा बन सकती है।
प्रतियोगिता में आर.के. नारायण, सुधा मूर्ति, रॉबिन शर्मा, शिव खेड़ा, रॉबर्ट कियोसाकी, पीटर थील और नेपोलियन हिल जैसे लेखकों की पुस्तकों से प्रेरणा लेकर भी विद्यार्थियों ने अपने विचारों को व्यावसायिक संभावनाओं से जोड़ने का प्रयास किया।
पांच श्रेणियों में विद्यार्थियों को मिला सम्मान
प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की रचनात्मकता और प्रस्तुतीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार दिए गए। ‘द अल्टीमेट शार्क अवॉर्ड’ सर्वश्रेष्ठ समग्र प्रस्तुति के लिए करीना कुमारी को मिला। ‘द पेज टर्नर अवॉर्ड’ पुस्तक से प्रभावी जुड़ाव के लिए अरुंधति गुप्ता को, ‘द पिच परफेक्ट अवॉर्ड’ सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतीकरण एवं आत्मविश्वास के लिए रीमा रॉय को, ‘द जजेज चॉइस अवॉर्ड’ सुप्रीति दास को तथा ‘द बुकवर्म-प्रेन्योर अवॉर्ड’ साहित्य के सर्वश्रेष्ठ उपयोग के लिए अंजलि मंडल को प्रदान किया गया।
कार्यक्रम का संचालन अनमोल ने किया। अंत में उन्होंने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार जताया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में कॉलेज की सचिव श्रीप्रिया धर्मराजन, सह सचिव सुधा दिलीप, प्राचार्या डॉ. मोनिका उप्पल, उप प्राचार्या डॉ. पामिला घोष दत्ता, शिक्षकगण एवं सहायक कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
‘बैटल ऑफ द बुक्स’ ने विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर दिया कि एक अच्छी किताब केवल पढ़ने के बाद बंद कर देने वाली चीज नहीं, बल्कि वह एक विचार, एक समाधान और कभी-कभी एक नए व्यवसाय की शुरुआत भी बन सकती है।




































