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Exclusive : मानगो नगर निगम ने चार योजनाओं का निकाला था टेंडर, काम पूरा किये बगैर 1.33 करोड़ से ज्यादा की राशि का हो गया बंदरबांट

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डीसी बोले गंभीर मामला, कराएंगे जांच, पूर्व में भी फतेह लाइव ने किया था यहां बड़ा खुलासा, जिसके बाद जेई का हो गया था तबादला और सुरेश यादव के ऊपर लाये गए थे अपर नगर आयुक्त 

चरणजीत सिंह.

जमशेदपुर में मानगो नगर निगम में जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से एक बड़ा घोटाला प्रकाश में आया है. इसके तहत मानगो नगर निगम क्षेत्र में 15वें वित्त आयोग से निकाली गई विभिन्न चार योजनाओं का करीब 1.33 करोड़ से ज्यादा काम पूर्ण किये बगैर ही ठेकेदार को राशि का भुगतान कर दिया गया है.  इनमें दो योजना ऐसी भी है, जिसमें काम शुरु भी नहीं हुआ. नगर निगम में हुए खेल ने झारखंड सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार के भी राजस्व को चूना लगाने का काम किया है. जानकार बताते हैं कि झारखंड राज्य में यह पहला मामला होगा, जब बिना कार्य किये बगैर ठेकेदार को इतनी बढ़ी राशि का भुगतान कर दिया गया, क्योंकि डीएमसी सह अप्पर नगर आयुक्त सुरेश यादव का दो माह में कार्यकाल समाप्त हो रहा है. इस पूरे कार्य में डीएमसी सह अप्पर नगर आयुक्त सुरेश यादव और जूनियर इंजीनियर सुबोध कुमार की जवाबदेही बनती है.

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ऐसे में इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता कि इन दोनों अधिकारियों की मिलीभगत से ही 15वें वित्त आयोग की राशि की लूट कर सरकार को चूना लगाने का खेल खेला गया है. मामले को लेकर सुरेश यादव से उनका पक्ष लेने के लिए फतेह लाइव की ओर से शुक्रवार की शाम 8 बजकर छह मिनट में फोन किया गया था, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया. बहरहाल, इस पूरे मामले को लेकर पीएमओ कार्यालय एवं एसीबी को भी शिकायत की गई है. लोगों की मांग है कि ईडी से इनके कार्यकाल में हुई सारी योजनाओं की जांच कराई जाए.

इसकी शिकायत स्थानीय लोगों ने फतेह लाइव से की थी. लोगों की शिकायत की पड़ताल करने शुक्रवार को बीते शुक्रवार को फतेह लाइव की टीम उक्त कार्य स्थल पहुंची, जहां कार्य किया जाना था. हमारी टीम ने बकायदा लोगों से बातचीत भी की. साथ ही जीपीएस कैमरा से मौजूद कार्यस्थल की फोटोग्राफी और वीडियो भी लिया गया. जहां पड़ताल में यह बात सामने आई कि उपरोक्त कार्य में दो स्थानों पर कार्य हुआ ही नहीं है और दो जगह पर 20 फीसदी कार्य कर सौ फीसदी राशि का भुगतान कर दिया गया है. कुल मिलाकर यह बड़ा गड़बड़ घोटाला हुआ है. इसकी निष्पक्ष जांच होती है तो कई जिम्मेदार लोगों की गर्दन फंसना तय है. इसके इतर भी सुरेश यादव के कार्यकाल में मानगो नगर निगम में 15वें वित्त आयोग से कई कार्य हुए हैं. इसकी जांच पड़ताल करने पर बड़ा घोटाला का पर्दाफाश होने का अनुमान है.

यह है टेंडर की प्रक्रिया

जानकारी के अनुसार 14 माह पूर्व उप नगर आयुक्त सुरेश यादव के द्वारा ई-ई-निविदा निमंत्रण सूचना UDHD/MMC/03/2023-24 तारीख 29 अप्रैल 2023 को विभिन्न योजना का चार टेंडर निकाला गया. ये चारों टेंडर आशुतोष कुमार पांडे नामक ठेकेदार ने 28.99 प्रतिशत बिलो में प्राप्त किया. इस कार्य को बीओक्यू (बिल ऑफ क्वांटीटिस) के द्वारा छह माह में कार्य को संपन्न करना था. कार्य समय पर नहीं करने पर 10 प्रतिशत काटकर पेमेंट किया जाना होता है. यहां तो कार्य हुआ भी नहीं और 1.3396700. करोड़ रुपये का छह माह पूर्व ही विभाग से राशि की निकासी हो गई, जो जांच का विषय है. अगर निष्पक्ष जांच हुई तो यह राशि और भी बढ़ सकती है.

इन योजनाओं के लिए हुआ था टेंडर

ई-टेंडर-03य2023-24

बालीगुमा कृषि विभाग ऑफिस से लेकर पावर ग्रिड सब स्टेशन तक पेवर्स ब्लॉक पथ निर्माण कार्य. (फतेह लाइव की पड़ताल में यह बात सामने आई कि यहां काम हुआ ही नहीं.) (इसकी लागत-28 लाख की थी.)

कृषि ऑफिस से सब स्टेशन का रास्ता

न्यू वाटिका ग्रीन सिटी से लेकर गंगा कॉम्प्लेक्स तक पेवर्स ब्लॉक पथ निर्माण कार्य (यहां भी काम हुआ ही नहीं.) (लागत-28 लाख)
लक्ष्मण नगर में मनोज स्टोर से लेकर स्वर्णरेखा नदी तक पेवर्स ब्लॉक पथ निर्माण कार्य. (लोगों ने बताया कि एक सप्ताह पहले यह कार्य तीस प्रतिशत हुआ, लेकिन विभाग के द्वारा पेमेंट पूरा हो गया) एवं मानगो गुरुद्वारा रोड से क्रॉस रोड पुराना अनुग्रह नारायण स्कूल से लेकर लाली सिंह रोड तक. (अभी कार्य शुरु हुआ है) . (लागत-39 लाख 7 हजार 280 रुपये.)

गुरुद्वारा रोड

आजादनगर में रोड नंबर नौ में पेवर्स ब्लॉक पथ का निर्माण कार्य. (यहां 50 प्रतिशत कार्य हुआ, लेकिन राशि पूरी निकासी हो गई). (लागत-38 लाख 7 हजार 280 रुपये)

गंभीर मामला, जांच कराएंगे : डीसी

इस मामले को लेकर डीसी अनन्य मित्तल से बातचीत की गई. उन्होंने मामले को गंभीर बताते हुए जांच करवाने की बात कही है. डीसी ने कहा कि बिना कार्य पूर्ण किये ठेकेदार को राशि का आवंटन नहीं हो सकता है. अगर ऐसा हुआ है तो मामला गंभीर है. इसे संज्ञान में लेकर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

क्या कहता है नगर एवं आवास विभाग का नियम

योजना मिलने के बाद संवेदक को एग्रीमेंट की तय तिथि के छाह माह के अंदर योजना पूर्ण करने के बाद ही राशि का भुगतान दिया जाना होता है. अगर कार्य में विलंब होता है तो उस कुल राशि का 10 फीसदी पेनाल्टी चार्ज कटता है. बिना कार्य शुरु किये राशि का भुगतान किया जाना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है. यह सरकारी खजाना दुरुपयोग का मामला बनता है. इसमें दोषी पर भारतीय संविधान दंड के तहत 420, 409 और 161 (ए) समेत विभिन्न धाराओं पर केस दर्ज किया जा सकता है. वहीं, उक्त राशि को ठेकेदार से सर्टिफिकेट केस कर वापस सरकारी खजाने में लेने की प्रक्रिया की जाती है. बताया जाता है कि यह 15वें वित्त आयोग की राशि ट्रेजररी में ना जाकर डायरेक्ट बैंक चेक के द्वारा अपर नगर आयुक्त के आदेश  से दिया जाता है.

ई-टेंडर udhd/mmc/032023-24

केंद्र सरकार की फंड का हुआ दुरुपयोग

बताया जाता है कि यह कार्य नगर विकास एवं आवास विभाग को केंद्र सरकार की ओर से 15वें वित्त आयोग के तहत यह राशि दी गई थी. कुल मिलाकर यह केंद्र सरकार के राजस्व का दुरुपयोग हुआ है.

एक बार  जेई, फिर कार्यपालक पदाधिकारी व डीएमसी और अब अप्पर नगर आयुक्त के पद पर मारी कुंडली

मानगो नगर निगम से सुरेश यादव का रिश्ता काफी पुराना है. पूर्व में यह यहां जेई, एसडीओ (ए.ई), कार्यपालक पदाधिकारी (स्पेशल ऑफिसर) रहे हैं. उसके बाद डीएमसी होकर कुछ ही महीनों में अप्पर नगर आयुक्त मानगो में पदभार सौंपा गया. इनकी पहुंच एक बड़े मंत्री से बताई जाती है. अगले दो महीनों में यह सेवानिवृत्त होने वाले हैं. यह सिंचाई विभाग से प्रतिनियुक्ति पर नगर विकास एवं आवास विभाग में पदस्थापित हैं. सूत्र बताते हैं कि इन्होंने अपने जमशेदपुर के कार्यकाल में अरबों की संपत्ति अर्जित की है. मानगो में ही मधुसूदन डी चौधरी में दो डुप्लेक्स, हिल व्यू कॉलोनी में पांच कट्‌ठा में जी-4 बिल्डिंग, रांची में भी कई फ्लैट हैं. वहीं, इनके पैतृक गांव खगड़िया में भी करोड़ों की संपत्ति है. एक सरकारी मुलाजिम के पास इतनी संपत्ति का होना जांच का विषय है.

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सुरेश यादव का जब पावर हो गया था सीज

मानगो नगर निगम में ऐसे कई घोटाला करने को लेकर अपर नगर आयुक्त सुरेश यादव सुर्खियों में रहे हैं. इसी साल 18 फरवरी को फतेह लाइव  में  खबर प्रकाशित हुई थी जिसका लिंक ऊपर देखा जा सकता है. इसमें डीएमसी के पद पर रहते हुए सुरेश यादव ने मानगो गांधी मैदान रविवार को छुट्‌टी के दिन शिड्यूल पर टेंडर बांटने के लिए बैठक बुलाई थी. इसमें विभिन्न ठेकेदारों में आपस में मारपीट हुई थी. इसका एक्सक्लूसिव वीडियो फतेह लाइव में खबर के साथ चलाया गया था. इस खबर के बाद दो दिनों के भीतर इनके ऊपर सरकार की ओर से अपर नगर आयुक्त रंजीत लोहरा की पदस्थापना कर दी गई थी. वहीं, लूट खसोट के इस मामले में विभागीय कार्र्वाई करते हुए जेई सुबोध कुमार का भी तबादला कर दिया गया था. लेकिन हाल में अपनी पैरवी की बदौलत सुरेश यादव जहां अपर नगर आयुक्त का पद पाने में कामयाब हो गए. वहीं, जेई सुबोध भी वापस मानगो नगर निगम में आ चुके हैं. आपको बता दें कि 2023 में जब ई टेंडर निकाला गया था तब सुरेश यादव मानगो नगर निगम में ही पदस्थापित थे. 

पूर्व में छपी खबर का ईपीएस

 

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