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Jamshedpur : गुरु गोबिंद सिंह जी भक्ति तथा शक्ति के अद्वितीय संगम थे :सतनाम सिंह गंभीर

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फतेह लाइव, रिपोर्टर.

ऑल इंडिया सिंह स्टूडेंट्स फेडरेशन के पूर्वी भारत अध्यक्ष सतनाम सिंह गंभीर ने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व पर साकची गुरुदावरा साहिब में गुरु ग्रंथ साहिब के सामने नतमस्तक हुए। सतनाम सिंह गंभीर ने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व पर कहा कि विश्व की बलिदानी परम्परा में अद्वितीय होने के साथ-आथ गुरु गोविन्द सिंह एक महान लेखक, मौलिक चिन्तक तथा संस्कृत सहित कई भाषाओं के ज्ञाता भी थे। उन्होंने स्वयं कई ग्रन्थों की रचना की। वे विद्वानों के संरक्षक थे। 52 कवि और साहित्यकार उनके दरबार की शोभा बढ़ाते थे। वे भक्ति तथा शक्ति के अद्वितीय संगम थे। इसीलिए उन्हें ‘संत सिपाही’ भी कहा जाता है।

उन्होंने सदा प्रेम, सदाचार और भाईचारे का सन्देश दिया। किसी ने गुरुजी का अहित करने की कोशिश भी की तो उन्होंने अपनी सहनशीलता, मधुरता, सौम्यता से उसे परास्त कर दिया। गुरुजी की मान्यता थी कि मनुष्य को किसी को डराना भी नहीं चाहिए और न किसी से डरना चाहिए। वे अपनी वाणी में उपदेश देते हैं भै काहू को देत नहि, नहि भय मानत आन। वे बाल्यकाल से ही सरल, सहज, भक्ति-भाव वाले कर्मयोगी थे। उनकी वाणी में मधुरता, सादगी, सौजन्यता एवं वैराग्य की भावना कूट-कूटकर भरी थी। उनके जीवन का प्रथम दर्शन ही था कि “धर्म का मार्ग सत्य का मार्ग है और सत्य की सदैव विजय होती है”।

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