WhatsApp Image 2026-08-13 at 5.45.20 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 12.53.32
WhatsApp Image 2026-08-14 at 12.53.33 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 5.45.21
WhatsApp Image 2026-08-14 at 12.53.32 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 5.45.21 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 5.45.21 P
WhatsApp Image 2026-08-13 at 5.56.39
WhatsApp Image 2026-08-14 at 12.53.50 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 5.56.40 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 5.57.06 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 6.01.52 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 6.01.53 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 6.01.53
WhatsApp Image 2026-08-13 at 6.03.06 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 6.03.20 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 6.03.45 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 6.03.46 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 6.03.46

Giridih : जमुआ के रांगामाटी में ब्रिटिश शासन काल से मनाई जा रही है चैती नवरात्र पूजा

SHARE:

  • ब्रिटिश काल से चली आ रही परंपरा, रांगामाटी में श्रद्धा और आस्था का प्रतीक

फतेह लाइव, रिपोर्टर

गिरिडीह जिले के जमुआ प्रखंड के रांगामाटी (कटु टांड़) में चैती वासंतिक नवरात्र की पूजा ब्रिटिश शासन काल से प्रचलित है. बताया जाता है कि 1933 के दशक में जमींदारी प्रथा के दौरान यहां के जमींदार टूका नाथ ने खपरैल नुमा भवन में मां भगवती की स्थापना कर पूजा शुरू की थी. इस पूजा में ग्रामीण स्व. कैला महतो, बढन महतो और फतू राम का भी सहयोग रहा. यह परंपरा धीरे-धीरे गांव के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गई.

इसे भी पढ़ें Ghatsila : सोना देवी विश्वविद्यालय और यंग इंडिया के बीच MoU पर हस्ताक्षर

Gambhir Car Associate Gambhir Car Associate Motion Ads Motion Ads

रांगामाटी में चैती नवरात्र की परंपरा से जुड़ी रोचक कहानी

जमींदारी प्रथा के समाप्त होने के बाद जब जमींदार चले गए, तो कुछ वर्षों तक पूजा बंद रही. इस दौरान गांव में विभिन्न प्रकार के अपशगुन और महामारी फैल गई, जिससे गांववासियों में डर का माहौल बन गया. इसी बीच एक स्थानीय चरवाहा वजीर महतो ने माता मंदिर के पास भगवती का कोप का दृश्य देखा. इस घटना के बाद ग्रामीणों ने पंडितों से परामर्श किया, जिन्होंने पूजा फिर से शुरू करने की सलाह दी. पूजा शुरू होते ही आपदाएं रुक गईं और गांव में शांति लौट आई। इसके बाद गांववासियों ने पुराने मंदिर को तोड़कर भव्य मंदिर का निर्माण कराया.

इसे भी पढ़ें Galudih : चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन गालुडीह में मां कालरात्रि की धूमधाम से हुई पूजा

रांगामाटी मंदिर में चैती नवरात्र के दौरान भव्य आयोजन

चैती नवरात्र के दौरान नौ दिनों तक वैदिक ब्राह्मणों द्वारा मंदिर में चंडी पाठ किया जाता है. चैत नवमी और दशमी के दिन यहां दो दिवसीय मेला लगता है, जहां आसपास के लोग आकर माता के दर्शन करते हैं और मेला का आनंद उठाते हैं. यह मंदिर 11 एकड़ 60 डिसमिल क्षेत्र में फैला है, जिसमें शिव-पार्वती मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर, राम जानकी मंदिर, हनुमान मंदिर और एक विशाल तालाब है, जहां गांव के लोग छठ महापर्व पर छठी मैया को अर्घ्य अर्पित करते हैं. इस पूजा के सफल आयोजन में पूजा समिति के अध्यक्ष पंकज कुमार वर्मा, कोषाध्यक्ष गोविंद प्रसाद वर्मा, सचिव विक्रम कुमार वर्मा समेत कई ग्रामीणों का सहयोग महत्वपूर्ण रहा है.

अभी-अभी

ਪੰਜਾਬੀ ਖ਼ਬਰਾਂ

Horoscope

Weather

और पढ़ें

हिंदी खबर