Breaking News
Panthic gathering in the UK : ਅਕਾਲੀ ਦਲ ਵਾਰਸ ਪੰਜਾਬ ਯੂ.ਕੇ. ਵੱਲੋਂ ਪੰਥਕ ਮਸਲਿਆਂ, ਮੌਜੂਦਾ ਹਾਲਾਤ ਤੇ ਭਵਿੱਖੀ ਰਣਨੀਤੀ ’ਤੇ 4 ਅਕਤੂਬਰ ਨੂੰ ਹੇਜ਼ ਵਿਖੇ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਪੰਥਕ ਇਕੱਠ Jamshedpur : रामगढ़िया सभा में 4 अक्टूबर को रक्तदान शिविर, अधिक से अधिक लोगों से रक्तदान की अपील Jamshedpur : दुर्गा पूजा को लेकर पुलिस-पूजा समितियों की बैठक, सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था पर जोर Jamshedpur Police : बागबेड़ा में हथियार के साथ अपराधी गिरफ्तार, 17 से अधिक मामलों में रहा है आरोपी Jamshedpur : गांधी-शास्त्री जयंती पर अधिवक्ताओं के लिए विशेष शिविर, स्वास्थ्य बीमा और पेंशन योजना की दी जानकारी Jamshedpur : गांधी-शास्त्री जयंती पर नितारा फाउंडेशन का स्वास्थ्य जांच शिविर, 72 लोगों की हुई जांच
WhatsApp Image 2026-08-13 at 5.45.20 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 12.53.32
WhatsApp Image 2026-08-14 at 12.53.33 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 5.45.21
WhatsApp Image 2026-08-14 at 12.53.32 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 5.45.21 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 5.45.21 P
WhatsApp Image 2026-08-13 at 5.56.39
WhatsApp Image 2026-08-14 at 12.53.50 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 5.56.40 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 5.57.06 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 6.01.52 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 6.01.53 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 6.01.53
WhatsApp Image 2026-08-13 at 6.03.06 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 6.03.20 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 6.03.45 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 6.03.46 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 6.03.46

Ranchi : उच्च न्यायालय की अवमानना मामले में झारखंड उत्पाद विभाग के अधिकारियों को झेलनी पड़ी फटकार, कोर्ट ने सशरीर उपस्थिति का दिया आदेश

SHARE:

  • कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद जारी हुआ वसूली नोटिस, अब हर तिथि पर अधिकारियों को देनी होगी उपस्थिति
  • 5 अगस्त को होगी अगली सुनवाई, न्यायालय की सख्ती से बढ़ी अधिकारियों की चिंता

फतेह लाइव, रिपोर्टर

रांची स्थित झारखंड उच्च न्यायालय में वेबेल टेक्नोलॉजी लिमिटेड द्वारा जमशेदपुर के सहायक उत्पाद आयुक्त अजय कुमार और जेएसबीसीएल के प्रबंध निदेशक विजय कुमार सिन्हा के खिलाफ दायर अवमानना याचिका संख्या 6157/2025 पर सुनवाई हुई. मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायमूर्ति एम. एस. रामचंद्र राव एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोर्ट के अंतरिम आदेश के बावजूद जबरन की गई वसूली प्रथम दृष्टया न्यायालय की अवमानना प्रतीत होती है. कोर्ट ने नियम 393 के तहत दोनों अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए प्रत्येक सुनवाई में सशरीर उपस्थित रहने का आदेश दिया है.

इसे भी पढ़ें : Ranchi/Jamshedpur : ‘मइयां सम्मान योजना’ के लाभुकों एवं पदाधिकारियों से फोन एवं व्हाट्सएप के माध्यम से मांगी जा रही गोपनीय जानकारी, नागरिकों से सतर्क रहने की अपील

Gambhir Car Associate Gambhir Car Associate Motion Ads Motion Ads

कोर्ट के आदेश की अवहेलना पड़ी भारी, हर पेशी पर देनी होगी हाजिरी

दरअसल, झारखंड सरकार की ओर से वेबेल टेक्नोलॉजी को 11 अप्रैल 2025 को ₹20 करोड़ जमा करने का नोटिस दिया गया था. लेकिन इससे पहले ही 26 मार्च 2025 को रिट याचिका संख्या 661/2025 अदालत में लंबित थी, जिसपर अदालत ने संबंधित कार्रवाई पर रोक लगा दी थी. इसके बावजूद 11 अप्रैल को दोबारा नोटिस जारी कर दिया गया, जिससे परेशान होकर कंपनी ने एक और रिट याचिका संख्या 5257/2025 दाखिल की. इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आदेश दिया था कि नोटिस के तहत कोई भी आगे की कार्यवाही नहीं की जाएगी. बावजूद इसके, उत्पाद विभाग के सहायक आयुक्त अजय कुमार ने 11 जून को फिर से पत्र जारी कर कंपनी से ₹20.22 करोड़ की वसूली का निर्देश दिया.

इसे भी पढ़ें : Jamshedpur : बागबेड़ा में स्कूली बच्चों के बीच योग दिवस मनाया गया

अंतरिम आदेश को किया नजरअंदाज, फिर जारी हुआ नया वसूली पत्र

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई अंतरिम आदेश के उल्लंघन के दायरे में आती है और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए. न्यायालय ने झारखंड उच्च न्यायालय नियम, 2001 के नियम 393 के तहत नोटिस प्रपत्र-I जारी किया, जिसका अर्थ है कि दोनों प्रतिवादी अधिकारियों को अब अदालत के किसी भी आदेश तक हर सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना अनिवार्य होगा. याचिकाकर्ता कंपनी के अधिवक्ता जैद इमाम ने अदालत को बताया कि वेबेल टेक्नोलॉजी का सरकार पर वेतन और ओवरटाइम मद में ₹28 करोड़ का बकाया है, जिसे लेकर मामला पूर्व से ही न्यायिक विचाराधीन है.

इसे भी पढ़ें : धरती आबा जनभागीदारी अभियान के तहत आयोजित किए गए 16 ग्राम स्तरीय शिविर

₹28 करोड़ बकाया और ऊपर से वसूली का दबाव, अधिवक्ता बोले — यह न्यायालय की अवमानना

यह मामला झारखंड में सरकारी एजेंसियों द्वारा न्यायिक आदेशों के अनुपालन को लेकर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है. अदालत का यह आदेश यह भी दर्शाता है कि न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अब यह देखना अहम होगा कि आगामी 5 अगस्त 2025 को जब अगली सुनवाई होगी, तब इन अधिकारियों का पक्ष क्या होगा और अदालत उनके खिलाफ क्या रुख अपनाती है. इस मामले ने राज्य में “गुड गवर्नेंस” की नीति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.

अभी-अभी

ਪੰਜਾਬੀ ਖ਼ਬਰਾਂ

Horoscope

Weather

और पढ़ें

हिंदी खबर