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Ghatshila : स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना बनी किसानों के लिए अभिशाप

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विरोध में किसानों ने की सामूहिक बैठक बनी आंदोलन की रणनीति

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

घाटशिला गालूडीह में स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना अब किसानों के लिए अभिशाप बनती जा रही है. इसी को लेकर गालूडीह बराज पुल के सामने सैकड़ो की संख्या में दाएं नहर के किनारे खेती करने वाले विस्थापित किसानों ने शुक्रवार को एक बैठक का आयोजन किया. इस बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस मामले की जानकारी फिर से परियोजना के कार्यपालक अभियंता को लिखित रूप में दी जाएगी और अपने भविष्य के होने वाले आंदोलन की जानकारी भी उन्हें दे दी जाएगी.

 

इस संबंध में काशीडी गांव के किसानों ने बताया कि वह पहले बाय नहर के किनारे खेती कर रहे थे, लेकिन खेतों में पानी भर जाने के कारण उनकी खेती बर्बाद हो गई. 2017 के बाद से उन्हें ₹1 भी मुआवजा नहीं मिला. कुछ किसानों ने बताया कि उन्होंने इस वर्ष भी खेती की, लेकिन खेतों में पानी भर जाने के कारण फसल बार-बार बर्बाद हो गई. तमाम कार्य उपलब्ध कराने के बावजूद उन्हें मुआवजा नहीं मिला. इसके बाद किसानों ने सामूहिक बैठक करने का निर्णय लिया.

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इसी कड़ी में इस बैठक का आयोजन किया गया. स्वर्णरेखा दिगडि दैम दाई नहर विस्थापित संघर्ष समिति के तत्वावधान में आयोजित इस बैठक में काफी संख्या में किसान शामिल हुए. इस मौके पर समिति के अध्यक्ष व मुसाबनी के प्रखंड प्रमुख रामदेव हेंब्रम ने बताया की बाई नहर से झारखंड के किसानों को पानी मिल रहा है, जबकि दाई नहर उड़ीसा के लिए जाती है. इसका लाभ झारखंड प्रदेश के किसानों को नहीं मिल पाया है, जबकि इस नहर के किनारे 8000 से ज्यादा लोग विस्थापित हैं. इनकी और किसी का ध्यान नहीं है.

वह वर्षों से दाएं नहर के किसानों को पानी उपलब्ध कराने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी नहीं सुन रही है. इस मौके पर समिति के संरक्षक सुखलाल हेंब्रम ने कहा कि अब समय आ गया है कि हम सभी मिलकर आंदोलन करें और परियोजना के साथ-साथ सरकार को भी सबक सिखाएं. इस मौके पर समिति के अध्यक्ष उपेन सिंह ने भी आंदोलन की रणनीति तैयार की. इस मौके पर काफी संख्या में महिलाएं भी मौजूद रही. परियोजना के मुख्य कार्यपालक अभियंता को एक मांग पत्र भी सौंपा गया है.

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