शराब घोटाला और हजारीबाग वन भूमि मामले में जमानत के बाद कार्मिक विभाग में दिया योगदान, सरकार जल्द कर सकती है नई पोस्टिंग
फतेह लाइव, रिपाेर्टर।
झारखंड की नौकरशाही में एक बार फिर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे को लेकर हलचल तेज हो गई है। शराब घोटाला और हजारीबाग से जुड़े वन भूमि घोटाला मामले में न्यायालय से जमानत मिलने के बाद राज्य सरकार ने उनका निलंबन समाप्त कर दिया है। निलंबन समाप्त होने के बाद चौबे ने गुरुवार को झारखंड के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग में औपचारिक रूप से योगदान दे दिया।
कार्मिक विभाग ने उनके योगदान को स्वीकार करते हुए आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया के लिए संचिका मुख्य सचिव के पास भेज दी है। अब मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद उनकी नई पोस्टिंग तय की जाएगी। ऐसे में नौकरशाही के गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार उन्हें किस महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी सौंपती है।
सुप्रीम कोर्ट से मिली थी सशर्त जमानत
विनय चौबे को पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत मिली थी। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने जमानत देते हुए कई शर्तें भी निर्धारित की थीं।
अदालत के निर्देश के मुताबिक चौबे बिना अनुमति देश से बाहर नहीं जा सकेंगे। उन्हें जांच में पूरा सहयोग करना होगा और किसी भी गवाह को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करनी होगी।
कानूनी मामलों के सिलसिले में उन्होंने 14 महीने से अधिक समय जेल में बिताया। जमानत मिलने के बाद अब उनकी प्रशासनिक सेवा में वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ी है।
अब निगाहें नई पोस्टिंग पर
कार्मिक विभाग में योगदान के बाद अब सबकी नजर उनकी अगली पोस्टिंग पर है। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार उन्हें जल्द ही किसी महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी दे सकती है।
विनय कुमार चौबे झारखंड सरकार में पहले भी कई अहम पदों पर काम कर चुके हैं। वह मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के अलावा जल संसाधन, योजना-सह-वित्त और आबकारी जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। यही वजह है कि उनकी नई भूमिका को लेकर नौकरशाही में उत्सुकता बनी हुई है।
अनुभवी अधिकारी की वापसी पर बढ़ी चर्चा
लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया और निलंबन की स्थिति में रहने के बाद चौबे की मुख्यधारा में वापसी को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
हालांकि, उनके खिलाफ चल रहे मामलों और न्यायालय द्वारा लगाई गई शर्तों के बीच सरकार उनकी जिम्मेदारी किस तरह तय करती है, यह देखने वाली बात होगी।
राजनीतिक गलियारों में भी नजर
विनय चौबे की वापसी ने राजनीतिक हलकों में भी चर्चा को हवा दे दी है। भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद सरकार द्वारा निलंबन समाप्त किए जाने के फैसले पर विपक्ष की नजर भी रहेगी।
फिलहाल कार्मिक विभाग में योगदान के बाद नई पोस्टिंग के आदेश का इंतजार है। अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि विनय चौबे की वापसी हुई है, बल्कि यह है कि सरकार उन्हें अगली बार किस कुर्सी पर बैठाती है।



































