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Jamshedpur : हाई कोर्ट के फैसले ने उलझा दिया साकची गुरुद्वारा का मामला, सिविल न्यायालय की शरण ले सकता है पीड़ित पक्ष

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फतेह लाइव, रिपोर्टर. 

झारखंड हाई कोर्ट के एक फैसले ने साकची गुरुद्वारा कमेटी के चुनाव प्रकरण को अब और उलझा दिया है। इस आदेश को साकची और सेंट्रल कमेटी दोनों ही अपने पक्ष में बता रहे हैं। यहां आलम यह है कि ना तो कोई हारा है ना कोई जीता है।

झारखंड हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति आनंद सेन ने अपने आदेश में लिखा है कि दोनों पक्ष अर्थात याचिकाकर्ता साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सरदार निशान सिंह और प्रतिवादी सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सरदार भगवान सिंह के अनुसार चुनाव हो चुके हैं। ऐसे में इस याचिका में निर्णय के लिए कुछ भी नहीं है। चुनाव से पीड़ित कोई भी व्यक्ति कानून के अनुसार उचित सिविल न्यायालय में जा सकता है।

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यहां बताना उचित होगा कि साकची गुरुद्वारा कमेटी ने चुनाव प्रक्रिया शुरू करते हुए सत्येंद्र सिंह रोमी को चुनाव कमेटी का संयोजक चुना था। एसडीओ धालभूम के समक्ष हरविंदर सिंह मंटू एवं अन्य द्वारा शिकायत की गई कि चुनाव संयोजक का चुना जाना और प्रक्रिया सही नहीं है और इसके बाद एसडीओ ने 28 मई 2025 को आदेश जारी किया था कि सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के निगरानी में चुनाव होंगे।

निशान सिंह ने इस आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में सिविल रिट 2704 /2025 दाखिल किया। इसकी पहली सुनवाई में एसडीओ के आदेश पर रोक लगा दी गई और उसके उपरांत चुनाव संयोजक सतिंदर सिंह रोमी ने चुनावी प्रक्रिया पूरी की और निशान सिंह को प्रधान घोषित कर दिया।

वहीं सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने भी चुनावी प्रक्रिया पूरी की ओर सरदार हरविंदर सिंह मंटू को प्रधान घोषित कर दिया है। साकची एवं केंद्रीय कमेटी ने इसी तथ्य को हाई कोर्ट में रखा। इसी के मद्देनजर हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि दोनों पक्ष के अनुसार चुनाव हो चुके हैं और ऐसे में जो पीड़ित व्यक्ति है कानून के अनुसार सिविल न्यायालय की शरण ले सकता है।

यहां उल्लेखनीय है कि सरदार निशान सिंह की टीम गुरुद्वारा कमेटी के प्रबंधन में काबिज है तो स्वाभाविक रूप से पीड़ित सरदार हरविंदर सिंह मंटू हैं। अब ऐसे में देखना होगा कि सिख समाज आपस में बैठक कर इस मामले को सुलझाता है या मामले सुलझाने को सिविल कोर्ट की शरण में जाता है। यदि सिविल कोर्ट की शरण में जाते हैं तो अदालती कार्रवाई में कई साल लगना तय है।

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