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Jamshedpur : बाल विवाह मुक्त भारत के आह्वान पर आदर्श सेवा संस्थान ने पूर्वी सिंहभूम में निकाला जागरूकता मार्च, हजारों की तादाद में शामिल हुए लोग

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• जिले में पिछले डेढ़ साल में 445 बाल विवाह रुकवाने वाले गैर सरकारी संगठन आदर्श सी संस्थान ने कहा, इस अभियान से बाल विवाह के खात्मे की लड़ाई को मिलेगी गति

• रैली में बाल विवाह पीड़िताओं, सरकारी अफसरों, पंचायत प्रतिनिधियों व शिक्षकों सहित बड़ी संख्या में शामिल आम लोगों ने ली बाल विवाह के खिलाफ शपथ

• विवाह संपन्न कराने वाले पंडितों व मौलवियों समेत धार्मिक नेताओं हलवाइयों, बैंड बाजा वालों सहित सभी हितधारकों ने किया अभियान का समर्थन

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फतेह लाइव, रिपोर्टर.

भारत सरकार के ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ के आह्वान के समर्थन में गैरसरकारी संगठन आदर्श सेवा संस्थान ने पूर्वी सिंहभूम जिले में बाल विवाह के खिलाफ 138 जागरूकता व शपथ ग्रहण कार्यक्रमों का आयोजन किया जिसमें समाज के हर तबके के लोग शामिल हुए। इस दौरान मशाल जुलूस और कैंडल मार्च में बाल विवाह पीड़िताओं, महिलाओं, बच्चों व पुरुषों सहित 2460 लोगों ने बाल विवाह के खिलाफ शपथ ली और जागरूकता के प्रसार के लिए विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भागीदारी की। इस दौरान पुरोहितों, मौलवियों, हलवाइयों, रसोइयों, सजावट, बैंड बाजा वालों व शादी का कार्ड छापने वाले प्रिंटिंग प्रेस के मालिकों जैसे विवाह से जुड़े सभी हितधारकों ने शपथ ली कि वे बाल विवाह संपन्न कराने में किसी भी तरह से भागीदारी नहीं करेंगे और इसकी सूचना तत्काल संबंधित अधिकारियों को देंगे। आदर्श सेवा संस्थान 250 से भी अधिक अग्रणी गैरसरकारी संगठनों के देशव्यापी गठबंधन ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ (जेआरसी) का सहयोगी है जो जिले में बाल विवाह की रोकथाम के लिए काम कर रहा है। आदर्श सेवा संस्थान एवं कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन ने स्थानीय प्रशासन के साथ सहयोग व समन्वय से कानूनी हस्तक्षेपों और परिवारों एवं समुदायों को समझा-बुझा कर अकेले 2023-24 में ही जिले में 445 बाल विवाह रुकवाए हैं।

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी द्वारा शुरू किए गए ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान का पुरजोर समर्थन करते हुए गैरसरकारी संगठन आदर्श सेवा संस्थान के लक्खी दास ने कहा, “यह अभियान हमारे विकसित भारत के सपने को पूरा करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। देश की बच्चियों को शिक्षित, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाए बिना हम इस सपने को पूरा नहीं कर सकते और बाल विवाह इसमें सबसे बड़ी बाधा है। बाल विवाह की रोकथाम के लिए सभी पक्षों को साथ लेकर चलने और बचाव-संरक्षण एवं अभियोजन नीति पर अमल के मंत्रालय के इस फैसले का हम स्वागत करते हैं। ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ का सहयोगी संगठन होने के नाते हम पहले से ही इस रणनीति पर काम करते आ रहे हैं। हमारे लिए यह गर्व की बात है कि हमने इस जिले में जो अभियान शुरू किया था, वह अब राष्ट्रव्यापी अभियान बन गया है।”

इस राष्ट्रव्यापी अभियान का समर्थन करते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, “हमने जब यह अभियान शुरू किया था तो यह समस्या को उसकी जड़ से मिटाने के लिए बाल विवाह की ऊंची दर वाले राज्यों पर केंद्रित एक लक्षित प्रयास था। एक सुविचारित दृष्टि और रणनीति के साथ शुरू हुआ यह अभियान अब राष्ट्रव्यापी शक्ल ले चुका है और आज देश सदियों से देश में जड़ें जमाए बैठी इस कुप्रथा के खात्मे के लिए एकजुट है। जिसने भी भारत की बेटियों की पुकार सुनी, उनकी आवाज उठाई और बाल विवाह मुक्त भविष्य के सपने की ओर बढ़ने में मदद की, हम उन सभी को धन्यवाद देते हैं।”
आदर्श सेवा संस्थान 250 से भी ज्यादा गैरसरकारी संगठनों के देशव्यापी गठबंधन ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ (जेआरसी) का सहयोगी संगठन है जो देश में बाल सुरक्षा तंत्र को मजबूती प्रदान करने व बाल अधिकारों के सुरक्षा व संरक्षण के प्रोत्साहन के लिए कार्य कर रहे हैं।

कार्यक्रम में मौजूद एक बाल विवाह पीड़िता संतोषी मुंडा ने इस अपराध के खात्मे के लिए सरकार के संकल्प पर संतोष जताते हुए इस मौके पर कहा, “ उसकी 16 वर्ष की उम्र में माता-पिता द्वारा उसकी जबरन सादी कराई गई । जिसके पश्चात् उसको ससुराल वालों द्वारा पताड़ित किया गया एक दिन मौका पाकर ससुराल से भागकर मायके या गई । किंतु माता पिता से भी कोई सहारा नहीं मिला तब वह child line के पास गई एवं चाइल्डलाइन के द्वारा संरक्षण दिया गया। वर्तमान में बच्ची 19 वर्ष की है। जब बच्ची का विवाह दिया गया था तब वह 16 वर्ष की थी। अभी बच्ची सोना देवी यूनिवर्सिटी में B.A. SOCIL WORKER की पढ़ाई कर रही है । यह बच्ची उन सभी बच्चों के लिए प्रेरणा है, जो प्रेमप्रसंग से विवाह कर गलत उठा लेती है लेते हैं।
बाल विवाह के खिलाफ यह सामूहिक लामबंदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ के आह्वान के समर्थन में हुई जिसकी शुरुआत 27 नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने की थी। दौरान उन्होंने पंचायतों और स्कूलों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई और उम्मीद की इस जा रही है कि जल्दी ही शपथ लेने वालों की संख्या 25 करोड़ तक पहुंच जाएगी।

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