फतेह लाइव, रिपोर्टर।
झारखंड सरकार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता और जमशेदपुर के महात्मा गांधी मेमोरियल चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल के पूर्व चिकित्सक डॉ. मृत्युंजय सिंह के बीच चल रहा कानूनी विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। जमशेदपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के पास दर्ज कराई गई इस शिकायत को क्षेत्राधिकार के तहत सांसद-विधायक विशेष अदालत (एमपी-एमएलए कोर्ट) में स्थानांतरित कर दिया गया है, जहां वर्तमान में अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी (SDJM) चाईबासा इस संवेदनशील मामले की सुनवाई कर रहे हैं।
मामले की पृष्ठभूमि और कानूनी धाराएं
यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ था। जब बन्ना गुप्ता राज्य के स्वास्थ्य मंत्री थे। उस दौरान डॉ. मृत्युंजय सिंह पर कर्तव्य से अनुपस्थित रहने का आरोप लगाया गया था, जिसके बाद वे छह महीने के लिए निलंबित रहे थे। हालांकि, बाद में हुई विभागीय जांच में उन्हें पूरी तरह दोषमुक्त कर दिया गया और उन्होंने वर्ष 2026 में दोबारा अपनी सेवा शुरू कर दी। वर्तमान में डॉ. मृत्युंजय सिंह पलामू में कार्यरत हैं, लेकिन इस अदालती मामले के सिलसिले में उन्हें समय-समय पर जमशेदपुर और चाईबासा के न्यायालयों में देखा जाता है।
डॉ. सिंह का आरोप है कि उन्हें गैर-कानूनी तरीके से काम से हटवाया गया था। पूर्व मंत्री के खिलाफ शिकायत में भारतीय न्याय संहिता और कानून की कई गंभीर धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
इन धाराओं के तहत आरोप
• धारा 198: लोक सेवक द्वारा किसी व्यक्ति को नुकसान पहुँचाने के इरादे से जानबूझकर कानूनी निर्देशों की अवहेलना करना।
• धारा 224: किसी लोक सेवक को चोट पहुँचाने या क्षति की धमकी देना।
• धारा 227: न्यायालय में शपथ या कानून के तहत झूठा साक्ष्य (गलत बयान) प्रस्तुत करना।
• धारा 248: किसी व्यक्ति को दुर्भावनापूर्ण तरीके से नुकसान पहुँचाने के इरादे से झूठा आपराधिक आरोप लगाना।
• धारा 351: आपराधिक धमकी देना।
न्यायालय में अब तक की कार्रवाई
इस मामले की जांच गवाही प्रक्रिया के तहत अब तक महत्वपूर्ण गवाह—राज किशोर सिंह एवं प्रभाकर चौधरी का बयान अदालत के समक्ष दर्ज कराया जा चुका है। इसके साथ ही, बीते बुधवार को डॉ. मृत्युंजय सिंह ने अपनी बेगुनाही और आरोपों की पुष्टि के लिए कई महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेजों को भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया है।
डॉ. मृत्युंजय सिंह पर भी दर्ज है मामला
दूसरी तरफ, जानकारी के मुताबिक इस मामले में एक और पेंच फंसा हुआ है। डॉ. मृत्युंजय सिंह पर भी पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता के नाम से कथित तौर पर फर्जी प्राथमिकी (प्रथम सूचना रिपोर्ट) बनाने और उसे सामाजिक माध्यमों (सोशल मीडिया) पर प्रसारित करने का आरोप है। इस संबंध में जमशेदपुर के कदमा थाना में मामला दर्ज है। पुलिसिया जांच में शुरुआती तौर पर डॉ. सिंह पर लगे यह विवादित आरोप सत्य पाए गए हैं, लेकिन तकनीकी और कानूनी प्रक्रियाओं के कारण अभी तक उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है और डॉ. सिंह ने इस मामले में अब तक अदालत से जमानत भी नहीं ली है।
न्यायालय के इस रुख और दोनों तरफ से पेश किए जा रहे साक्ष्यों के बाद अब यह देखना बेहद रोचक और महत्वपूर्ण हो गया है कि चाईबासा की विशेष अदालत पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता और शिकायतकर्ता डॉक्टर के इन गंभीर आरोपों-प्रत्यारोपों पर क्या अंतिम कार्रवाई सुनिश्चित करती है? वैसे मामले में अगली सुनवाई की तारीख कोर्ट ने 20 नवंबर तय की है।




































