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World Book Fair : जमशेदपुर के बेटे की साहित्यिक उड़ान – विद्या भारती चिन्मय विद्यालय के पूर्व छात्र श्रेयांश अंकित का तीसरा उपन्यास ‘द वेट ऑफ फॉरगॉटन थिंग्स’ विश्व पुस्तक मेले में लॉन्च

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फतेह लाइव, रिपोर्टर. 

जमशेदपुर के टेल्को टाउन से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक मंच पर पहचान बनाने वाले श्रेयांश अंकित ने अपनी तीसरी कृति “The Weight of Forgotten Things” के साथ एक बार फिर पाठकों का ध्यान खींचा है। विद्या भारती चिन्मय विद्यालय, टेल्को के पूर्व छात्र और जमशेदपुर से ताल्लुक रखने वाले श्रेयांश का यह नया उपन्यास हाल ही में नई दिल्ली के विश्व पुस्तक मेले में लॉन्च किया गया, जहाँ इसे पाठकों और साहित्यप्रेमियों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिल रही है।

इससे पहले श्रेयांश अंकित के दो उपन्यास “Seven Lives” और “Search for the Brahmastra” प्रकाशित हो चुके हैं, जिन्हें युवाओं और गंभीर पाठकों के बीच अच्छी सराहना मिली थी। तीसरे उपन्यास में उन्होंने अपनी लेखनी को और अधिक परिपक्व व गहन बनाया है।

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“The Weight of Forgotten Things” स्मृति, विस्मृति और अतीत के बोझ पर आधारित एक संवेदनशील और रहस्यमय कथा है। उपन्यास का नायक रवि भारत के भूले-बिसरे कस्बों में भटकता है, जहाँ लोग उसे बिना पहचाने भी पहचानते हैं। पतंगे, भूली यादें, रहस्यमयी स्थान और अनकही सच्चाइयाँ—यह कहानी बताती है कि जो हम भूलना चाहते हैं, वही सबसे गहरे रूप में लौटता है।

शिक्षा के क्षेत्र में श्रेयांश अंकित IIM अहमदाबाद के पूर्व छात्र हैं और वर्तमान में IIMA Endowment Fund में Associate Vice President के रूप में कार्यरत हैं। सार्वजनिक नीति, बीमा और परोपकार के क्षेत्र में अनुभव रखने वाले श्रेयांश अपनी रचनाओं में सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाओं को प्रभावी ढंग से पिरोते हैं।

श्रेयांश की माँ आरती श्रीवास्तव ख़ुद हिंदी की एक विख्यात लेखिका हैं जिन्होंने बचपन से हीं श्रेयांश की लेखनी कला को प्रोत्साहन दिया। माँ के साथ श्रेयांश अपने पिता रिटायर्ड कस्टम्स सुपरिंटेंडेंट विजय श्रीवास्तव, बड़ी बहन डॉक्टर अंकिता श्रेया, बहनोई वैभव लोकेश और चाचा बिनय कुमार को अपना आधार स्तंभ मानते है।

यह उपन्यास Notion Press द्वारा प्रकाशित किया गया है और वर्तमान में अमेज़न, फ्लिपकार्ट सहित विभिन्न ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन उपलब्ध है। पाठकों से मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ यह संकेत देती हैं कि श्रेयांश अंकित का यह तीसरा उपन्यास भी साहित्यिक जगत में अपनी मजबूत छाप छोड़ने जा रहा है।

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