एएनएए-टीजी नॉर्थ इंडिया–दिल्ली रीयूनियन 4.0 में डी नोबिली के पूर्व छात्रों ने साझा कीं पुरानी यादें, आठ पूर्व शिक्षकों का हुआ सम्मान
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
स्कूल के दिनों की सुनहरी यादों, पुराने मित्रों की आत्मीय मुलाकात और गुरुजनों के प्रति सम्मान को समर्पित एएनएए-टीजी (ऑल नोबिलियन्स अचीवर्स एसोसिएशन–द ग्लोबल) नॉर्थ इंडिया–दिल्ली रीयूनियन 4.0 का भव्य आयोजन नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित सिविल सर्विसेज ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट (CSOI) में किया गया। समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत नोबिलियन्स, उनके परिवारों तथा आठ पूर्व शिक्षकों ने हिस्सा लिया।
इस रीयूनियन में धनबाद-बोकारो क्षेत्र के डी नोबिली स्कूलों के पूर्व छात्रों की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही। डिगवाडीह, सीएमआरआई, सिंदरी, सिजुआ, मैथन, मुगमा और चंद्रपुरा स्थित डी नोबिली स्कूलों से शिक्षा प्राप्त कर देश के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे पूर्व छात्र वर्षों बाद एक मंच पर जुटे और स्कूल के दिनों की यादों को साझा किया।
आयोजन का उद्देश्य वर्षों बाद पुराने सहपाठियों और शिक्षकों को एक मंच पर लाकर स्कूल के दिनों की यादों को फिर से जीवंत करना तथा नोबिलियन परिवार के बीच मित्रता, सम्मान और अपनत्व के रिश्ते को मजबूत करना था।
कार्यक्रम की शुरुआत पंजीकरण एवं स्वागत किट वितरण से हुई। इसके बाद जलपान, दीप प्रज्वलन और विद्यालय प्रार्थना के साथ समारोह का औपचारिक शुभारंभ हुआ। डी नोबिली स्कूल की पारंपरिक मॉर्निंग प्रेयर के बाद दिवंगत शिक्षकों एवं साथियों की आत्मा की शांति के लिए एक मिनट का मौन रखा गया। थॉट फॉर द डे और न्यूज जैसी प्रस्तुतियों ने सभी को स्कूल के दिनों की यादों में पहुंचा दिया।
पूर्व शिक्षकों का हुआ सम्मान
समारोह का सबसे भावुक क्षण पूर्व शिक्षकों का सम्मान रहा। इस अवसर पर डी नोबिली सीएमआरआई, सिंदरी, सिजुआ एवं मैथन से सेवानिवृत्त सुषमा अग्रवाल, मीरा लाल वर्मा, रियाज अहमद, राज विज, शकुंतला अमर, परवीन इकबाल, सीमा अंजुम और सुदेशना भट्टाचार्य का सम्मान एवं अभिनंदन किया गया।
वर्षों बाद अपने पुराने शिक्षकों को अपने बीच पाकर पूर्व छात्र भावुक दिखाई दिए। उन्होंने शिक्षकों के मार्गदर्शन एवं योगदान को याद करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
देश के विभिन्न क्षेत्रों में पहचान बना रहे नोबिलियन्स
समारोह में प्रशासनिक सेवाओं, चिकित्सा, उद्योग, विधि, शिक्षा, वास्तुकला, बैंकिंग एवं अन्य क्षेत्रों से जुड़े कई प्रमुख नोबिलियन्स शामिल हुए।
प्रमुख प्रतिभागियों में दीपक अग्रवाल, आईएएस, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नेफेड; डॉ. मनोज कुमार, अपर सचिव, विधि एवं न्याय मंत्रालय, भारत सरकार; तथा डॉ. यशोवर्धन पाठक, आईआरएस, जीएसटी आयुक्त, नोएडा शामिल रहे।
चिकित्सा क्षेत्र से डॉ. रोहित कौशल, निदेशक एवं प्रमुख, यूरोलॉजी, रोबोटिक्स एवं किडनी ट्रांसप्लांट, एशियन हॉस्पिटल, फरीदाबाद; डॉ. अर्नेश भट्टाचार्य, एसोसिएट कंसल्टेंट, सेंटर फॉर न्यूरोसाइंसेज, बीएलके मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नई दिल्ली; डॉ. उमा किशोर, डॉ. नवाब अख्तर और डॉ. शिखा प्रिया उपस्थित रहे।
उद्यमिता एवं उद्योग जगत से काशिफ निजाम उस्मानी, अलेकेश रॉय और आशुतोष आनंद ने भाग लिया। विधि क्षेत्र से नंदन कुमार झा, कुमार करण, शुभम चौहान और तृप्ति विनी उपस्थित रहे।
अन्य पेशेवरों में शुभंकर सेनगुप्ता, चिंतन गांधी, बिष्णु अग्रवाल्ला, मनीष सक्सेना और निशा लता जायसवाल सहित कई नोबिलियन्स शामिल हुए।
धनबाद-बोकारो के डी नोबिली स्कूलों के पूर्व छात्र भी जुटे
समारोह में डी नोबिली स्कूल डिगवाडीह, सीएमआरआई, सिंदरी, सिजुआ, मैथन, मुगमा और चंद्रपुरा के पूर्व छात्रों ने भी अपना परिचय दिया। धनबाद-बोकारो क्षेत्र के इन स्कूलों से शिक्षा प्राप्त कर देश के विभिन्न हिस्सों में कार्यरत पूर्व छात्रों के एक साथ आने से समारोह में झारखंड की पुरानी यादों की झलक भी देखने को मिली।
इनमें अभिषेक पाठक, अमित सेन, अनूप कुमार गुप्ता, बिष्णु अग्रवाल्ला, चिंतन गांधी, कौशिक अधिकारी, खुशबू, कौशिक सरकार, कृतिका रचना, मनीष सक्सेना, मनीष सिन्हा, मार्कंडेय मिश्रा, मयंक सिंह, पिउली, राज नंदन, रविंदर अमर, संजीव कुमार सिन्हा, सुबीर कुमार, सनी सुमांशु, सुप्रिया जायसवाल, सुसांतो दासगुप्ता, तृप्ति विनी और विवेकानंद झा शामिल रहे।
खेल और संगीत ने लौटाया स्कूल का दौर
पूर्व छात्रों के परिचय के बाद खेल, मनोरंजक गतिविधियों और संवादात्मक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों के दौरान पुराने स्कूल के दिनों से जुड़ी यादें, किस्से और अनुभव फिर से सामने आए। वर्षों बाद मिले मित्रों ने एक-दूसरे के साथ हंसी-मजाक किया और पुरानी यादें साझा कीं।संगीत एवं नृत्य प्रस्तुतियों ने समारोह में उत्साह भर दिया। समारोह के अंत में सभी नोबिलियन्स ने एक साथ स्कूल सॉन्ग गाया।
आयोजन टीम का जताया आभार
आयोजन को सफल बनाने में योगदान के लिए मयंक सिंह, डॉ. मनोज कुमार, आशुतोष आनंद, निशा लता जायसवाल, शुभंकर सेनगुप्ता, शुभम कुमार, खुशबू भारती, कृतिका रचना और कुमार करण सहित पूरी आयोजन टीम के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया गया।
स्वादिष्ट दोपहर के भोजन के साथ समारोह का समापन हुआ। इसके बाद पूर्व छात्रों, शिक्षकों और उनके परिवारों ने एक-दूसरे से आत्मीयता के साथ विदाई ली और भविष्य में फिर मिलने का संकल्प लिया।
यह आयोजन केवल एक पुनर्मिलन नहीं रहा, बल्कि पुरानी यादों, गुरुजनों के सम्मान, दोस्ती और झारखंड सहित देशभर में फैले नोबिलियन परिवार की एकजुटता का उत्सव बन गया।
















