राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी समेत 9 आरोपियों पर आरोप तय किए, सात को मिली राहत; अब ट्रायल की बारी
फतेह लाइव, रिपाेर्टर।
IRCTC के रेलवे होटलों से जुड़ा वह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है, जिसकी शुरुआत करीब दो दशक पहले हुई थी। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 10 सितंबर 2026 को इस मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत नौ आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया। वहीं सात आरोपियों को अदालत ने डिस्चार्ज कर दिया।
अदालत के इस आदेश के बाद अब मामले की असली कानूनी परीक्षा ट्रायल के दौरान होगी। अगली सुनवाई के लिए 3 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की गई है।
आखिर मामला है क्या?
इस पूरे मामले की कहानी उस दौर से जुड़ी है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। जांच एजेंसियों का आरोप है कि रेलवे के रांची और पुरी स्थित BNR होटलों के संचालन और रखरखाव का ठेका देने की प्रक्रिया में नियमों से कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई और एक निजी कंपनी सुजाता होटल्स को लाभ पहुंचाया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, होटल टेंडर में कथित लाभ के बदले पटना में जमीन के एक लेन-देन का रास्ता बना। यही जमीन आगे चलकर पूरे मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बन गई।
होटल का टेंडर और पटना की जमीन का कनेक्शन
CBI के आरोपों के मुताबिक, जमीन पहले एक कंपनी के माध्यम से खरीदी गई और बाद में उसका प्रभावी नियंत्रण लालू परिवार से जुड़ी लारा प्रोजेक्ट्स तक पहुंचा।
जांच एजेंसी ने जमीन के कथित बाजार मूल्य और उसके लेन-देन की कीमत के बीच अंतर को भी जांच का हिस्सा बनाया। एजेंसियों का आरोप है कि होटल टेंडर से मिलने वाले कथित लाभ और जमीन के लेन-देन के बीच संबंध था।
यही कथित लेन-देन बाद में मनी लॉन्ड्रिंग जांच का आधार बना।
2004-05 से शुरू हुई कहानी, 2017 में पहुंची जांच एजेंसी तक
मामले की जड़ें 2004-05 के दौर में जाती हैं। उस समय रेलवे के कुछ होटलों के प्रबंधन और संचालन से संबंधित प्रक्रिया IRCTC के माध्यम से आगे बढ़ी थी।
मई 2004 में लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री बने। CBI के अनुसार, 2005-06 में होटल संचालन से संबंधित टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं हुईं।
हालांकि इस मामले में जांच एजेंसियों की सक्रिय कार्रवाई कई वर्षों बाद हुई। जुलाई 2017 में CBI ने FIR दर्ज की। इसके बाद अप्रैल 2018 में चार्जशीट दाखिल की गई।
CBI के बाद ED की एंट्री, यहीं से जुड़ा मनी लॉन्ड्रिंग एंगल
CBI की कार्रवाई के बाद प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने भी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से जांच शुरू की।
ED का फोकस इस बात पर रहा कि यदि टेंडर प्रक्रिया में कोई आपराधिक लाभ हासिल किया गया था, तो उससे जुड़ी कथित रकम या संपत्ति का इस्तेमाल किस तरह हुआ।
यानी मामले में दो प्रमुख जांच धाराएं सामने आईं—एक तरफ होटल टेंडर में कथित अनियमितता और दूसरी तरफ उससे जुड़े कथित आर्थिक लाभ तथा संपत्ति का लेन-देन।
10 सितंबर का कोर्ट आदेश क्यों अहम है?
राउज एवेन्यू कोर्ट ने 10 सितंबर को नौ आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया।
इनमें लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, सरला गुप्ता, पीसी गुप्ता, लारा प्रोजेक्ट्स, सुजाता होटल्स, विजय कोचर और विनय कोचर शामिल हैं।
अदालत ने प्रथमदृष्टया मुकदमा आगे चलाने का आधार माना। मामले में राजनीतिक रूप से प्रेरित होने की दलील को भी अदालत ने स्वीकार नहीं किया।
सात आरोपियों को कोर्ट से राहत
इसी आदेश में सात आरोपियों को डिस्चार्ज भी किया गया। इनमें गौरव गुप्ता, नाथ मल ककरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलस्यान, राजीव कुमार रेलन और मेसर्स अभिषेक फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।
इसका मतलब है कि इन सात के खिलाफ इस मामले में आरोपों के आधार पर आगे ट्रायल नहीं चलेगा, जबकि नौ आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही जारी रहेगी।
आरोप तय होना मतलब दोष साबित होना नहीं
यहां एक कानूनी बात समझना जरूरी है। अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि आरोपी दोषी साबित हो गए हैं।
चार्ज फ्रेमिंग का मतलब है कि अदालत को प्रथमदृष्टया ऐसा आधार मिला है जिसके आधार पर मुकदमा चलाया जा सकता है। अब अभियोजन पक्ष को अपने आरोपों को दस्तावेजों, गवाहों और अन्य साक्ष्यों के जरिए साबित करना होगा।
इसके बाद बचाव पक्ष को भी अभियोजन के साक्ष्यों को चुनौती देने और अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार होगा। अंतिम फैसला ट्रायल पूरा होने के बाद ही होगा।
अब लालू परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या?
अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि जांच एजेंसियां अदालत के सामने होटल टेंडर, कथित लाभ, पटना की जमीन और मनी लॉन्ड्रिंग के बीच संबंध को किस तरह साबित करती हैं।
अभियोजन को अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य पेश करने होंगे। दूसरी ओर बचाव पक्ष इन आरोपों, दस्तावेजों और गवाहों की विश्वसनीयता पर सवाल उठा सकता है।
इसलिए 10 सितंबर का आदेश मामले का अंत नहीं, बल्कि अगले और महत्वपूर्ण कानूनी चरण की शुरुआत है।
IRCTC केस और Land-for-Jobs केस अलग-अलग
लालू परिवार से जुड़े दोनों मामलों को अक्सर एक साथ चर्चा में लिया जाता है, लेकिन कानूनी तौर पर ये अलग मामले हैं।
IRCTC होटल केस में रेलवे के होटलों के कथित टेंडर और उससे जुड़े जमीन के लेन-देन की जांच है।
वहीं Land-for-Jobs केस में रेलवे में कथित नौकरी के बदले जमीन लेने के आरोपों की जांच की गई है।
दोनों मामलों में आरोप और कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग हैं।
अब 3 अक्टूबर को क्या होगा?
राउज एवेन्यू कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 3 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की है। आरोप तय होने के बाद अब मामला ट्रायल की दिशा में आगे बढ़ेगा।
आने वाले चरण में अभियोजन पक्ष अपने साक्ष्य और गवाह अदालत के सामने पेश करेगा। बचाव पक्ष को उन पर जिरह और आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार होगा।
फिलहाल तस्वीर साफ है—IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत नौ आरोपियों के खिलाफ मुकदमा आगे बढ़ेगा। लेकिन अभी किसी आरोपी को दोषी ठहराया नहीं गया है। अंतिम फैसला ट्रायल में सामने आने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगा।



































