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Jamshedpur : जुगसलाई वाटर प्लांट के अंतर्गत 22 लाख के घटिया सामान लगाने का संबंध में पेयजल मंत्री ने उपायुक्त को दिया कार्रवाई करने का निर्देश

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संदीप पासवान और दीपक सहाय को पहले दिया था जांच करने का निर्देश

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

जमशेदपुर के जुगसलाई वाटर प्लांट में 22 लाख के उपकरणों के लगाने के संबंध में वर्ष 2024 मार्च महीने में मैकेनिकल डिविजन जमशेदपुर द्वारा 22 लाख रुपए के सामानों के लिए टेंडर प्रकाशित किया गया था. इसमें घटिया सामान का इस्तेमाल किया गया और शिकायत करने के बाद भी झूठा रिपोर्ट बार-बार विभाग के द्वारा दिया गया. इसमें अभियंता गहलोत एवं कार्यपालक अभियंता सुनीता के साथ-साथ रांची के अधीक्षण अभियंता शंकर दास की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है.

इसे लेकर स्थानीय अधिवक्ता अमर तिवारी ने कार्यपालक अभियंता जमशेदपुर डिविजन से लेकर ऊपर के अधिकारी प्रधान सचिव पेयजल विभाग तक शिकायत की थी. विभाग के सचिव ने इस संबंध में जांच कमेटी का गठन करके जमशेदपुर भेजा था, जिसमें पीसी दास कार्यपालक अभियंता पेयजल एवं स्वच्छता यांत्रिक प्रमंडल गुमला, राधेश्याम रवि अधीक्षण अभियंता पेयजल एवं स्वच्छता अंचल चाईबासा इन दोनों के द्वारा संयुक्त रूप से नियुक्त कर मस्तराम मीणा प्रधान सचिव के निर्देश पर जांच करने के लिए जुगसलाई जलापूर्ति केंद्र भेजा गया था, जिसकी जांच रिपोर्ट अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई.

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यह टेंडर अन्ना ट्रेडर्स रांची को दिया गया किंतु टेंडर से रिलेटेड सारा कार्य पेयजल एवं स्वच्छता यांत्रिक प्रमंडल जमशेदपुर के पदाधिकारी द्वारा स्वयं से किया गया  अब सबसे बड़ा सवाल है कि जब कोई ठेकेदार काम लेता है तो उसके लोगों के द्वारा उसका सामानों को लगाने का कार्य किया जाना चाहिए, परंतु यह लगाने का कार्य यहां के जितेंद्र कुमार अभियंता और अन्य लोगों के द्वारा मिलकर किया गया. मतलब आपस में साठगांठ पूरी तरह से अन्ना ट्रेडर्स, जो कि ठेकेदार कभी भी स्वयं से कुछ काम नहीं किया और कई बार ब्रेकडाउन हुई स्टार्टर जली ट्रांसफार्मर जला एवं जलापूर्ति कई दिनों तक बाधित रही लेकिन कभी भी अन्ना ट्रेडर्स ठेकेदार जुगसलाई जमशेदपुर नहीं आया.

उनके आदेश पर पेयजल एवं स्वच्छता यांत्रिक प्रमंडल जमशेदपुर के अधिकारी खुद से कार्य करते रहे और इन लोगों की लापरवाही से जलापूर्ति जैसी अति आवश्यक सेवा जुगसलाई में कई बार बाधित रही. इससे प्रतीत होता है कि ये टेंडर महज नाम का किया गया है. सारे पदाधिकारी स्वयं से काम करके सारा कमिशन अपने में बांट लेंगे, एमएल 6 स्टार्टर के नाम पर घटिया स्टार्टर कम एम्पियर का लगाकर बिल भुगतान करवाने का प्रयास हो रहा, बार-बार स्टार्टर जल रहा है.

करीब अभी तक पांच बार स्टार्टर जल गया है, कोई रिपेयरिंग नहीं, विभाग के अफसरों ने पुराने स्टार्टर को लगा दिया. रांची के शंकर दास का इसमें मुख्य भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है, क्योंकि ठेकेदार भी रांची का और अधीक्षक अभियंता रांची के हैं. उससे यहां अनुमान लगाया जा रहा है कि वह आपस में पहले से परिचित है, क्योंकि उन्होंने इसके पूर्व जब स्टार्टर जल गया था तो उन्होंने किशन कुमार किस्कू यांत्रिक प्रमंडल के अभियंता को जो कि रांची में पदस्थापित है, उन्हें जमशेदपुर भेजा बदलने के लिए. यह सेवा किसके लिए की जा रही है. यह अधीक्षण अभियंता को बताना चाहिए, क्या जमशेदपुर में इंजीनियर नहीं थे. जब शिकायत किया गया तो उन्होंने कहा की देखरेख करने के लिए गए थे सवाल है कि घोटाले के बीच में ही जाने की क्या जरूरत थी जबकि रिपेयरिंग या बदलना ठेकेदार का काम है.

उपकरण नया क्यों नहीं है. बीसीएच कंपनी के का कहना है कि उस मॉडल के सभी स्टार्टर का हम वारंटी नहीं दे सकते, क्योंकि वह मॉडल 2015 का है, लेटेस्ट मॉडल नहीं है. अब यह पता चल रहा है कि विभाग के यांत्रिक प्रमंडल द्वारा सामानों की नापी की जा रही है. नापी करने का यह उद्देश्य साफ है कि मार्च के पहले उन्हें भुगतान करना है. अमर का कहना है कि सबसे पहले अधीक्षण अभियंता शंकर दास जमशेदपुर प्रमंडल यांत्रिक के सुनीता सामंत एवं तमाम इंजीनियरों को वहां से तबादला किया जाए, ताकि जाँच प्रभावित न हो.

इसके पूर्व अमर तिवारी ने जिले के उपायुक्त को इसकी शिकायत की थी जिसमें सूत्र से पता चला कि इसमें दो लोगों की टीम बनाई गई थी जिसमें दीपक सहाय और संदीप पासवान को नियुक्त किया गया था. परंतु अभी तक उन्होंने 3 महीने बीतने के बावजूद किसी तरह की कोई जांच नहीं की. अब यह पुनः देखने की बात है कि मंत्री का आदेश पर उपायुक्त क्या कार्यवाही करते हैं. अधिवक्ता अमर तिवारी का कहना है कि अभी कुछ दिन पूर्व टंकी जो की मात्र 15 साल पहले बनी थी. वह धराशाई हो गई और इस तरीके का सामान लगाने के बाद वह कितने दिनों तक चलेगी. इससे कितना नुकसान होगा. यह सबसे बड़ी बात है.

सबसे सोचने की बात है कि एक आम इंसान को शिकायत करते-करते छः महीने लग गए परंतु अभी तक विभाग की नींद नहीं खुली है और कार्यवाही के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है. इससे साफ साबित होता है कि लोग जब जागरूक होते हैं तो विभाग के बड़े अफसर भी उनकी मदद नहीं करते हैं और जब भारी दुर्घटना हो जाती है. तब लोगों की आंख खुलती है और कार्यवाही करने के नाम पर स्थानीय विधायक भी आवाज उठाने लगते हैं.

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