सोशल मीडिया पर ‘Rent a Garba Partner’ जैसे विज्ञापनों को लेकर चिंता, महिला सुरक्षा और त्योहार की मर्यादा पर बहस तेज
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
नवरात्रि के दौरान आयोजित होने वाले गरबा और डांडिया कार्यक्रमों के व्यवसायीकरण, सोशल मीडिया पर कथित भ्रामक विज्ञापनों और महिला सुरक्षा को लेकर सामाजिक संगठनों एवं प्रबुद्ध नागरिकों ने चिंता जताई है। इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर चल रही आलोचना के बीच ‘जश्न इवेंट’ की डांडिया नाइट रद्द होने का दावा किया गया है। हालांकि, कार्यक्रम रद्द होने के कारणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
चिंता जताने वालों का कहना है कि गरबा और डांडिया धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामूहिक उत्सव के प्रतीक हैं। ऐसे आयोजनों को केवल व्यावसायिक गतिविधि तक सीमित करने और ‘Rent a Garba Partner’ जैसे विज्ञापनों के जरिए लोगों को आकर्षित करने की प्रवृत्ति की जांच होनी चाहिए। उनका मानना है कि यदि ऐसे विज्ञापनों के पीछे धोखाधड़ी या महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा कोई जोखिम है, तो संबंधित एजेंसियों को समय रहते कार्रवाई करनी चाहिए।
आयोजनों में पहचान सत्यापन और सुरक्षा की मांग
सामाजिक संगठनों ने डांडिया आयोजनों में प्रवेश व्यवस्था की समीक्षा करने, जरूरत के अनुसार पहचान सत्यापन सुनिश्चित करने और संदिग्ध ऑनलाइन विज्ञापनों की जांच कराने की मांग की है। साथ ही आयोजन स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे, पर्याप्त सुरक्षा कर्मी, महिला सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था करने की अपील की गई है।
उन्होंने पुलिस के साइबर सेल से भी आग्रह किया है कि भ्रामक प्रचार, ऑनलाइन टिकट धोखाधड़ी और महिलाओं को निशाना बनाने वाली गतिविधियों की शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
टिकट बिक्री पर 18 प्रतिशत जीएसटी जमा हो रहा है या नहीं?
डांडिया आयोजनों को लेकर अब टिकट बिक्री और जीएसटी अनुपालन पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। सवाल है कि टिकट बेचकर व्यावसायिक आयोजन करने वाले आयोजक लागू कर व्यवस्था के तहत जीएसटी जमा कर रहे हैं या नहीं? यदि किसी आयोजक पर जीएसटी लागू होने के बावजूद कर जमा नहीं करने या बिक्री छिपाने का संदेह है, तो संबंधित कर विभाग को रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए।
हालांकि, प्रत्येक डांडिया टिकट पर स्वतः 18 प्रतिशत जीएसटी लागू होने का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। वास्तविक कर देयता आयोजन की प्रकृति, सेवा के वर्गीकरण, आयोजक के पंजीकरण और लागू कर नियमों पर निर्भर करती है। इसलिए टिकटों की कीमत, बिक्री का रिकॉर्ड, बिल और जीएसटी रिटर्न की जांच के बाद ही किसी कर अनियमितता की पुष्टि की जा सकती है।
यदि जांच में कर चोरी प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार बकाया कर, ब्याज और लागू जुर्माने की कार्रवाई हो सकती है। ऐसे मामलों में केंद्रीय या राज्य कर विभाग अपने अधिकार क्षेत्र के अनुसार जांच कर सकते हैं।
एंटी-इवेजन टीम से जांच कराने की मांग
सामाजिक स्तर पर यह मांग उठाई जा रही है कि संबंधित कर अधिकारियों को डांडिया आयोजनों की टिकट बिक्री और कर अनुपालन की जांच करनी चाहिए। सवाल यह भी है कि क्या संबंधित विभाग आयोजनकर्ताओं से टिकट बिक्री का विवरण, भुगतान का रिकॉर्ड और जीएसटी जमा करने के दस्तावेज मांगेगा?
अब निगाहें प्रशासन और कर विभाग पर हैं। आयोजनों की सुरक्षा, सोशल मीडिया पर भ्रामक विज्ञापनों और टिकट बिक्री में कर अनुपालन से जुड़े सवालों पर संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


































