Jamshedpur Tata Steel : उफ़…टाटा स्टील के भीतर भी जातिवाद !

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 मानव संसाधन विभाग के चीफ ने हड़काया तो सबको यही समझ आया

एचआरएम चीफ यशवंत पांडेय का कमेटी मेंबरों को तलब करने से चर्चा गरम

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

टाटा वर्कर्स यूनियन का चुनाव हुआ था तो टाटा स्टील की मानव संसाधन विभाग की प्रमुख अतरई सान्याल ने सर्वप्रथम जातिवादी राजनीति पर नाराजगी जताई थी. उनका साफ कथन था कि दुनिया इतनी आगे निकल चुकी है और टाटा वर्कर्स यूनियन के लोग जाति में लगे हुए हैं. उसके बाद सबको अहसास रहा कि जातिवाद की राजनीति का नंगापन मानव संसाधन विभाग तक नहीं जाना चाहिए. टाटा स्टील में वेज रिवीजन के समझौता के एक दिन पहले एचआरएम (स्टील) यशवंत पांडेय ने आधा दर्जन कमेटी मेंबरों को बुला कर हड़काया.

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उन्होंने जो कुछ कहा, वो हुबहू, संपादित और मिर्च मसाला लगा कर अलग अलग तरीके से टाटा वर्कर्स यूनियन के ऑफिस बेयरर्स और कमेटी मेंबरों तक पहुंच गया है. चर्चा है कि एचआरएम विभाग के कुछ सीनियर लोग खुद जातिवादी हो गए हैं. यहां बताना आवश्यक होगा कि एचआरएम चीफ यशवंत पांडेय और टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष स्वजातीय हैं. यशवंत पांडेय टाटा स्टील के पूर्व पदाधिकारी आरएस पांडेय के रिश्तेदार है. वे कुछ महीनों में सेवानिवृत भी हो जाएंगे.

टाटा स्टील में वेज समझौता से पहले टाटा वर्कर्स यूनियन के एनएस ग्रेड के सभी कमेटी मेंबर अध्यक्ष संजीव चौधरी उर्फ टुन्नू के आवास पर धमक गये थे. उनके तेवर भी बेहद कड़े थे. एनएस के कमेटी मेंबरों ने टुन्नू चौधरी को वेज समझौता के लिए यूनियन कार्यालय भी आने के लिए मजबूर कर दिया था. उस वक्त टुन्नू ने सार्वजनिक तौर पर कह डाला कि विरोध दर्ज कराने वालों के पीछे विजिलेंस लगा हुआ है. इसके बाद टाटा स्टील के एचआरएम चीफ (स्टील) यशवंत पांडेय ने कमेटी मेंबरों को तलब किया.

राजेश सिंह, प्रदीप दुबे, विभाकर कुमार, मनोज कुमार, नीरज पराशर, दिनेश कुमार से अलग अलग तरीके से बात की गई. यूनियन कार्यालय में होने वाली चर्चाओं पर यकीन करे तो कमेटी मेंबर से जातिवादी बातें भी कह कर शांत रहने को कहा गया. इस वाकये को सुनने वाले भौंचक हैं. कुछ और कंपनी अधिकारियों के बारे जातिवादी रुख की भी यूनियन कार्यालय में खूब चर्चा है.

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