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Jamshedpur Up Sangh : उत्तर प्रदेश संघ का चुनाव आगे बढ़ाने के लिए खुद दस्तखत किया, फिर डीसी से शिकायत भी कर दी

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डीपी शुक्ला ने उपायुक्त को लिखा कि बीते मार्च में कार्यकारिणी का कार्यकाल हो गया समाप्त

बीते मई में कार्यकारिणी समिति की बैठक में चुनाव एक साल आगे बढ़ाने कर सहमति के हस्ताक्षर भी

गौरी गांव की जमीन की खरीद की जांच में दोबारा दोषी पाये जाने के बाद डॉ शुक्ला ने शिकायत की

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

उत्तर प्रदेश संघ से निष्कासित किए गए निवर्तमान महासचिव डॉ डीपी शुक्ला ने उपायुक्त से शिकायत की है कि संस्था की कार्यकारिणी समिति का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी चुनाव नहीं कराया जा रहा है. शिकायत पत्र में कहा गया कि मार्च 2026 में वर्तमान कार्यसमिति का कार्यकाल खत्म हो गया है. इसके बावजूद चुनाव की घोषणा नहीं की गई है. रोचक तथ्य यह है कि बीते मई माह में उत्तर प्रदेश संघ की कार्यकारिणी समिति की बैठक हुई थी जिसमें सर्वसम्मति से कार्यकाल एक साल तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया. सहमति पत्र पर महासचिव के नाते डॉ डीपी शुक्ला ने भी हस्ताक्षर किया है. खुद सहमति का दस्तखत किया. गौरी गांव की जमीन की खरीद की जांच में दोषी पाए जाने के बाद डॉ डीपी शुक्ला की सदस्यता रद्द हुई तो उत्तर प्रदेश संघ के चुनाव में देरी की शिकायत दर्ज करा दी है. हालांकि, सदस्यता रद्द होने के बाद विजय सिंह राणा, डॉ डीपी शुक्ला और देवेश अवस्थी उत्तर प्रदेश संघ का चुनाव लड़ने, मत देने अथवा किसी आमसभा में भाग लेने के लिए अयोग्य हो गए हैं.

उत्तर प्रदेश संघ की वर्तमान कार्यकारिणी समिति का चुनाव जुलाई 2023 में हुआ था. 3 अगस्त को कार्यकारिणी समिति के लोगों का निर्वाचन का प्रमाणपत्र दिया गया है. संस्था के संविधान के मुताबिक तीन साल में चुनाव कराया जाना है. इस लिहाज से जुलाई खत्म होने तक उत्तर प्रदेश संघ का चुनाव हो जाना चाहिए. यद्यपि, बीते 8 मई को मोतीलाल नेहरू स्कूल ऑफिस में कार्यकारिणी समिति की बैठक हुई. इसमें कार्यसमिति सदस्य उमा शंकर शर्मा ने प्रस्ताव रखा कि कार्यकाल एक साल तक बढ़ाया जाये.

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कार्यसमिति समिति की उस बैठक में चर्चा हुई थी कि गौरी गांव की जमीन की जांच रिपोर्ट नहीं आई है और भी कई महत्वपूर्ण कार्य अधूरे हैं. इसलिए कार्यकाल बढ़ाना चाहिए. इस प्रस्ताव पर सबने सहमति दी. यह बैठक होने के कुछ दिनों के बाद आमसभा द्वारा गठित जांच समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट समर्पित कर दी. जांच में दोषी पाए जाने पर डॉ डीपी शुक्ला, विजय सिंह राणा और देवेश अवस्थी को संस्था से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.

खुद चार साल में उत्तर प्रदेश संघ का चुनाव कराए थे राणा और शुक्ला

उत्तर प्रदेश समेत पूरे भारत में एक कहावत है, सुपवा हँसे चलनिया पे जेकरे सौ सौ छेद. उत्तर प्रदेश संघ का पिछला चुनाव 2019 में हुआ था जिसमें विजय सिंह राणा अध्यक्ष और डॉ डीपी शुक्ला महासचिव चुने गए थे. उस वक्त भी संस्था के संविधान के मुताबिक तीन साल में चुनाव कराया जाना चाहिए था. जुलाई 2022 में चुनाव हो जाना चाहिए था. जुलाई 2023 में चुनाव हुआ. इस चुनाव में अध्यक्ष पद पर विजय सिंह राणा हार गए जबकि डॉ डीपी शुक्ला दोबारा महासचिव चुन लिये गए. और पीछे जाय तो 2008 से एकाध बार को छोड़ दिया जाय तो चार साल में ही संस्था का चुनाव होता रहा है. अधिकतर कार्यसमिति में शीर्ष पद पर डॉ डीपी शुक्ला की मौजूदगी भी रही है. सत्य यह भी है कि संस्था के संविधान में तीन साल में ही चुनाव कराने की बाध्यता है.

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