फतेह लाइव, रिपोर्टर,
राउरकेला रेलवे स्टेशन पर 80.52 लाख रुपये की लागत से निर्मित कैनोपी शेड के ढहने के मामले में रेलवे प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। हादसे के बाद जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया के बीच राउरकेला के आईओडब्ल्यू (इंस्पेक्टर ऑफ वर्क्स) तुहिन सुभ्रा सत्पथी का तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया गया है। उन्हें राउरकेला से चक्रधरपुर भेजा गया है।
दक्षिण-पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, तुहिन सुभ्रा सत्पथी को चक्रधरपुर में जेई (वर्क्स) के पद पर पदस्थापित किया गया है। वहीं, चक्रधरपुर में कार्यरत सीनियर जूनियर इंजीनियर प्रभाष रंजन को राउरकेला की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह प्रशासनिक फेरबदल कैनोपी शेड गिरने की घटना के बाद किया गया है।
गौरतलब है कि राउरकेला रेलवे स्टेशन परिसर में करीब 80.52 लाख रुपये की लागत से तैयार किया गया कैनोपी शेड अचानक धराशायी हो गया था। शेड के निर्माण और उसकी गुणवत्ता को लेकर घटना के बाद से ही सवाल उठ रहे थे। रेलवे प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच और जिम्मेदारी तय करने की दिशा में कार्रवाई शुरू की।
आईओडब्ल्यू का तबादला इस मामले में रेलवे प्रशासन की ओर से उठाया गया पहला बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, तबादले के आदेश में कारण के तौर पर प्रशासनिक आवश्यकता का उल्लेख किया गया है। इसके बावजूद शेड गिरने की घटना के बाद हुए इस फेरबदल को रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग में महत्वपूर्ण कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
तबादले के बाद राउरकेला रेलवे स्टेशन से जुड़े निर्माण एवं रखरखाव कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी अब प्रभाष रंजन संभालेंगे। रेलवे प्रशासन की ओर से आगे की जांच में निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों के पालन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल किए जाने की संभावना है।
कैनोपी शेड गिरने की घटना ने रेलवे के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में आईओडब्ल्यू के तबादले के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में किन-किन स्तरों पर जिम्मेदारी तय होती है और रेलवे प्रशासन की ओर से आगे क्या कार्रवाई की जाती है।















