बोले- 17 दिन से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों की आवाज लाठी और आंसू गैस से नहीं दबाई जा सकती
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
रांची विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस छोड़े जाने के मामले को लेकर पूर्व खादी बोर्ड सदस्य एवं वरिष्ठ भाजपा नेता कुलवंत सिंह बंटी ने हेमंत सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए सरकार से सवाल किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का आदेश किसने दिया।
कुलवंत सिंह बंटी ने कहा कि छात्र पिछले 17 दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे थे। वे किसी के साथ अभद्र व्यवहार नहीं कर रहे थे, बल्कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपने अधिकार, न्याय और भविष्य से जुड़े सवालों का जवाब मांग रहे थे। इसके बावजूद सरकार ने उनकी बात सुनने के बजाय लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लिया।
उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता जानना चाहती है कि छात्रों पर लाठीचार्ज का आदेश किसके निर्देश पर दिया गया। गृह विभाग मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास है, ऐसे में इस कार्रवाई की जिम्मेदारी कौन लेगा, सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।
बंटी ने कहा कि यदि छात्रों की मांगों पर सरकार का पक्ष स्पष्ट था तो उनके साथ बातचीत की जानी चाहिए थी। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले युवाओं पर बल प्रयोग किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सत्ता के अहंकार में यह भूल रही है कि आंदोलन कर रहे छात्र झारखंड का भविष्य हैं। लाठी और आंसू गैस के जरिए उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि दमन बढ़ेगा तो युवाओं की आवाज और मजबूती से उठेगी।
राहुल गांधी की चुप्पी पर भी उठाया सवाल
कुलवंत सिंह बंटी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की चुप्पी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस की कार्रवाई के बावजूद राहुल गांधी की ओर से कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई।
उन्होंने कहा कि जो लोग लोकतंत्र और संविधान की बात करते हैं, उन्हें ऐसे समय में छात्रों के साथ खड़ा होना चाहिए। जनता कांग्रेस और उसके सहयोगियों के कथित दोहरे रवैये को देख रही है।
बंटी ने कहा कि भाजपा युवाओं की आवाज को दबने नहीं देगी और छात्रों के अधिकार एवं न्याय की लड़ाई को सड़क से लेकर सदन तक मजबूती से उठाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि लाठी और आंसू गैस से छात्रों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। झारखंड के युवा अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।
















